Lucknow City

लोकतंत्र के रखवालों को बड़ा तोहफा : 5 लाख तक कैशलेस इलाज, CM ने किया ये भी ऐलान

राजकीय सम्मान से होगा अंतिम संस्कार, आपातकाल की 51वीं बरसी पर लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान, सीएम बोले- जेल की यातनाएं सहकर इन्होंने बचाया लोकतंत्र, 3,780 सेनानी और 1,461 आश्रितों को मिल रहा सरकारी संरक्षण

लखनऊ, 25 जून 2026:

आपातकाल की 51वीं बरसी पर आयोजित ‘संविधान हत्या दिवस’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को लोकतंत्र सेनानियों को सम्मानित करते हुए उनके लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार जल्द ही लोकतंत्र सेनानियों को प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये तक की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराएगी।इसके साथ ही उनके निधन पर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की व्यवस्था भी की जाएगी।

लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र सेनानियों को लोकतंत्र का सच्चा प्रहरी बताते हुए कहा कि आज उनका सम्मान करना गौरव की अनुभूति है। उन्होंने कहा कि इन लोगों ने लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए जेलों में अमानवीय यातनाएं सहीं लेकिन अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। इसलिए लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पित सरकार बनने के बाद प्रदेश में लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान की परंपरा को आगे बढ़ाया गया।

मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में 3,780 लोकतंत्र सेनानी तथा 1,461 उनके आश्रित हैं। राज्य सरकार वर्ष 2018 से लोकतंत्र सेनानियों और उनके मरणोपरांत आश्रितों को प्रतिमाह 20 हजार रुपये सम्मान राशि प्रदान कर रही है। इसके अलावा लोकतंत्र सेनानी या उनके उत्तराधिकारी (पति अथवा पत्नी) को एक सहायक के साथ प्रदेश परिवहन निगम की सभी श्रेणी की बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा भी दी जा रही है। सरकारी अस्पतालों में निशुल्क चिकित्सा की व्यवस्था पहले से लागू है।
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कार्यक्रम के दौरान सीएम ने छह महीने तक जेल में यातनाएं झेलने वाले लोकतंत्र सेनानियों भारत दीक्षित, गया प्रसाद सोनकर, राम सिंह कुशवाहा (हरदोई), विद्याराम वर्मा (हरदोई), अजय सिंह (बाराबंकी) और ओम प्रकाश गुप्ता (सीतापुर) को सम्मानित किया।

सुनाई अत्याचारों की दर्दनाक दास्तां

इस अवसर पर लोकतंत्र सेनानियों ने आपातकाल के दौरान हुए अत्याचारों की दर्दनाक दास्तां भी सुनाई। लोकतंत्र सेनानी भारत दीक्षित ने कहा कि आपातकाल लगाने का कोई औचित्य नहीं था, लेकिन सत्ता बचाने के लिए कांग्रेस सरकार ने लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन किया। उन्होंने बताया कि गिरफ्तारी के समय उनके कपड़े तक फाड़ दिए गए और सत्याग्रह में भाग लेने पर उन्हें बर्बर यातनाएं दी गईं।

‘जेलों में उखाड़े गए कैदियों के नाखून’

वहीं, लोकतंत्र सेनानी विद्याराम वर्मा ने कहा कि आज भी आपातकाल की यादें मन को विचलित कर देती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौर में विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। उनके घर को रात में ऐसे घेरा गया जैसे किसी बड़े अपराधी की तलाश हो। उन्होंने बताया कि जेलों में कैदियों के नाखून उखाड़े गए और जबरन नसबंदी जैसी घटनाएं भी हुईं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाली पीढ़ियां हमेशा याद रखेंगी कि लोकतंत्र और राष्ट्रहित के लिए संघर्ष करने वालों का सम्मान करना सरकार का दायित्व है। उनकी सरकार इस दायित्व का पूरी निष्ठा से निर्वहन करती रहेगी।

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