
लखनऊ, 27 जुलाई 2026:
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को लखनऊ स्थित सरकारी आवास पर जनता दर्शन लगाया। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे लोगों ने यहां अपनी समस्याएं मुख्यमंत्री के सामने रखीं। किसी की शिकायत जमीन और राजस्व विवाद से जुड़ी थी तो किसी ने पुलिस कार्रवाई, इलाज या आर्थिक मदद की जरूरत बताई। मुख्यमंत्री ने लोगों से सीधे बातचीत कर उनकी परेशानी समझी और संबंधित अधिकारियों को जल्द कार्रवाई के निर्देश दिए।
फरियादियों को दफ्तरों के चक्कर न लगवाएं
जनता दर्शन में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को साफ हिदायत दी कि अपनी समस्या लेकर आने वाले लोगों को बेवजह एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर न दौड़ाया जाए। शिकायत जिस विभाग से जुड़ी है, वहां उसका निस्तारण तय समय में कराया जाए। उन्होंने कहा कि फरियादी को कार्रवाई के लिए बार-बार अधिकारियों के चक्कर लगाने की स्थिति नहीं आनी चाहिए।
राजस्व और पुलिस की शिकायतों पर खास जोर
मुख्यमंत्री ने खास तौर पर राजस्व और पुलिस विभाग से जुड़े मामलों को गंभीरता से लेने को कहा। जमीन, कब्जे, पारिवारिक विवाद, पुलिस कार्रवाई और अन्य शिकायतों पर अधिकारियों को संवेदनशीलता के साथ काम करने की हिदायत दी गई। उन्होंने कहा कि शिकायत का समाधान सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि ऐसा होना चाहिए जिससे पीड़ित को वास्तविक राहत मिले।

गंभीर बीमारी में पैसे की कमी न बने रुकावट
जनता दर्शन में कुछ लोग गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आर्थिक मदद की गुहार लेकर भी पहुंचे। मुख्यमंत्री ने उन्हें भरोसा दिलाया कि पैसों की कमी के कारण किसी जरूरतमंद का इलाज नहीं रुकने दिया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐसे मरीजों के इलाज का इस्टीमेट तत्काल तैयार कराया जाए, ताकि सरकारी सहायता की प्रक्रिया जल्द आगे बढ़ सके।
बच्चों से मिले तो चॉकलेट देकर बढ़ाया हौसला
जनता दर्शन में अपनी शिकायत लेकर आईं महिलाओं के साथ बच्चे भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने बच्चों से भी बातचीत की और उन्हें चॉकलेट दी। इस दौरान बच्चों के चेहरे पर मुस्कान दिखी। शिकायत लेकर पहुंचे परिवारों के लिए जहां मुख्यमंत्री ने समस्या के समाधान का भरोसा दिया, वहीं बच्चों के साथ उनका यह सहज अंदाज जनता दर्शन के माहौल को थोड़ा हल्का करता नजर आया।
करीब 200 लोगों से हुई मुलाकात, लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी
मुख्यमंत्री ने जनता दर्शन में करीब 200 फरियादियों से मुलाकात की। योगी ने अधिकारियों से कहा कि किसी पीड़ित के मामले में लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि फरियादी को उसकी शिकायत पर हुई कार्रवाई की जानकारी मिले और उसे बार-बार अपनी बात रखने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।






