
लखनऊ, 8 जुलाई 2026:
यूपी में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को बढ़ावा देने के लिए योगी सरकार की ईवी विनिर्माण एवं मोबिलिटी प्रोत्साहन नीति-2022 अब जमीन पर असर दिखाने लगी है। परिवहन विभाग के ताजा आंकड़े बताते हैं कि ईवी क्रय सब्सिडी योजना के तहत प्रदेशभर में लोगों का रुझान तेजी से बढ़ा है। सबसे अधिक आवेदन राजधानी लखनऊ से मिले हैं। आगरा, गौतमबुद्ध नगर (नोएडा), गाजियाबाद और वाराणसी भी शीर्ष जिलों में शामिल हैं। ये रुझान बताता है कि स्वच्छ, किफायती और आधुनिक परिवहन की ओर प्रदेश तेजी से कदम बढ़ा रहा है।
परिवहन विभाग के अनुसार लखनऊ के ट्रांसपोर्ट नगर आरटीओ में सबसे अधिक 12,520 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इसके बाद आगरा में 10,752, गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) में 6,088, गाजियाबाद में 5,556, वाराणसी में 4,059, कानपुर नगर में 3,895, लखनऊ के महानगर एआरटीओ में 3,839, सहारनपुर में 3,768, गोरखपुर में 3,204 और प्रयागराज में 3,110 आवेदन दर्ज किए गए हैं।
दूरदराज क्षेत्रों में भी ईवी को लेकर बढ़ रहा भरोसा
ईवी का बढ़ता क्रेज अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। छोटे जिलों में भी लोग तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। मऊ में 817, गाजीपुर में 750, कुशीनगर में 547, उन्नाव में 387, महाराजगंज में 170, संत कबीर नगर में 101 और सिद्धार्थनगर में 74 आवेदन मिले हैं। यह बदलाव दर्शाता है कि प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों में भी ईवी को लेकर भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है।
दोपहिया ईवी खरीदने पर 18 हजार रुपये तक की बचत, कार पर एक लाख
सरकार की योजना वाहन खरीदारों को बड़ा आर्थिक लाभ दे रही है। दोपहिया इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर 5 हजार रुपये की राज्य सब्सिडी मिल रही है। इसके साथ ही रोड टैक्स और पंजीकरण शुल्क में 100 प्रतिशत छूट दी जा रही है। स्मार्ट कार्ड आरसी और एचएसआरपी नंबर प्लेट शुल्क में राहत को जोड़ दें तो एक दोपहिया ईवी खरीदने पर करीब 18 हजार रुपये तक की बचत संभव है। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि गैर सरकारी ई-बसों पर 20 लाख रुपये तक, चार पहिया इलेक्ट्रिक वाहनों पर 1 लाख रुपये तक और दोपहिया पर 5 हजार रुपये तक की सहायता दी जा रही है।

पेट्रोल और डीजल वाहनों की तुलना में काफी किफायती है ईवी
परिवहन विभाग का कहना है कि इलेक्ट्रिक वाहन केवल खरीद के समय ही नहीं, बल्कि संचालन के दौरान भी जेब पर हल्के पड़ते हैं। पेट्रोल और डीजल वाहनों की तुलना में इनकी प्रति किलोमीटर लागत कम होने से उपभोक्ताओं की हर साल हजारों रुपये की बचत हो रही है। साथ ही पेट्रोल-डीजल की खपत घटने से वायु प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आ रही है।
विभाग के मुताबिक वर्ष 2030 तक देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत तक पहुंच जाती है तो कच्चे तेल के आयात बिल में करीब एक लाख करोड़ रुपये की बचत संभव होगी। इस लक्ष्य को हासिल करने में उत्तर प्रदेश की भूमिका अहम मानी जा रही है। सरकार अधिक से अधिक लोगों को ईवी सब्सिडी योजना से जोड़ने पर जोर दे रही है।






