विजय पटेल
रायबरेली, 27 जून 2026:
रायबरेली जिला अस्पताल एक गंभीर लापरवाही के आरोपों को लेकर चर्चा में है। इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कई मरीजों के तीमारदारों का कहना है कि उन्हें मार्च 2026 में एक्सपायर हो चुके ग्लूकोज, इंजेक्शन लगाए गए। आरोप है कि इससे कुछ मरीजों की तबीयत भी बिगड़ गई। शिकायत करने पर सुनवाई नहीं हुई तो परिजनों ने डायल 112 पर सूचना दी। इसके बाद अस्पताल स्टॉफ ने कई मरीजों को जल्दबाजी में डिस्चार्ज करना शुरू कर दिया।
फुरसतगंज, अमेठी से आए अमित ने बताया कि उनके चाचा को रात में पैरालिसिस का अटैक पड़ा था। इलाज के लिए जिला अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया, जहां उन्हें अप्रैल 2023 में निर्मित व मार्च 2026 में एक्सपायर लेबल वाला ग्लूकोज चढ़ा दिया गया। जब इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने स्टॉफ से शिकायत की, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। उनका कहना है कि पुलिस पहुंचने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
इमरजेंसी वार्ड में भर्ती एक दूसरे मरीज के परिजन ने भी इसी तरह का आरोप लगाया। उनका कहना है कि रात करीब एक बजे उसने चाची आशा देवी को भर्ती कराया था। चाची को एक्सपायरी डेट की ग्लूकोज व दवाएं दी गईं, जिससे हालत और बिगड़ गई। परिजनों का आरोप है कि शिकायतें बढ़ने पर सही इलाज करने के बजाय अस्पताल स्टॉफ मरीजों को डिस्चार्ज करने में जुट गया।
जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक पुष्पेंद्र कुमार ने बताया कि पूरे मामले की जांच के लिए समिति गठित कर दी गई है। उन्होंने कहा कि शाम तक रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है। अगर जांच में किसी कर्मचारी या अधिकारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल जांच जारी है। रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगा कि एक्सपायरी डेट का ग्लूकोज मरीजों की नसों में कैसे पहुंचा और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
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