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TET पर घमासान : रायबरेली में सड़कों पर उतरे शिक्षक, कानून बदलने की रखी मांग

विकास भवन से कलेक्ट्रेट तक निकाला मार्च, प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के नाम भेजा गया ज्ञापन, संगठन ने कहा कि पुराने नियमों के तहत नियुक्त शिक्षकों पर बाद में टीईटी की शर्त थोपना ठीक नहीं, सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसलों के बाद लाखों शिक्षकों में बढ़ी चिंता, सेवा सुरक्षा की मांग तेज

विजय पटेल

रायबरेली, 18 जून 2026:

Teacher Eligibility Test यानी टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के बैनर तले गुरुवार को रायबरेली में बड़ी संख्या में शिक्षक सड़कों पर उतर आए। विकास भवन परिसर में जुटे शिक्षकों ने टीईटी के विरोध में नारेबाजी की और मार्च निकालते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां से प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री और उत्तर प्रदेश सरकार के नाम जिलाधिकारी के जरिए ज्ञापन भेजकर कानून में बदलाव की मांग उठाई गई।

प्रदेश अध्यक्ष शिवशंकर सिंह ने कहा कि वर्ष 2010 से पहले और उत्तर प्रदेश में टीईटी लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों ने उस समय तय योग्यता और चयन प्रक्रिया के आधार पर नौकरी हासिल की थी। ऐसे में कई साल बाद उन पर टीईटी की अनिवार्यता लागू करना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसलों के बाद देशभर के लाखों शिक्षकों के बीच असुरक्षा और चिंता का माहौल बना हुआ है।

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जिलाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह ने कहा कि किसी भी नियम या अधिसूचना को पूर्व प्रभाव से लागू करना प्राकृतिक न्याय और कानूनी स्थिरता के सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने मांग की कि 23 अगस्त 2010 से पहले देशभर में नियुक्त शिक्षकों और उत्तर प्रदेश में 27 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से स्थायी छूट दी जाए।

महासंघ ने सरकार से अध्यादेश या विधायी संशोधन लाकर शिक्षकों की नौकरी, वरिष्ठता, पदोन्नति समेत सभी सेवा लाभों को सुरक्षित रखने की मांग की। प्रदर्शन में जिले के अलग-अलग इलाकों से पहुंचे बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल रहे।

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