
लखनऊ/चित्रकूट, 31 जुलाई 2026:
चित्रकूट को धार्मिक व सांस्कृतिक पर्यटन के बड़े केंद्र के तौर पर विकसित करने की तैयारी तेज हो गई है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने शुक्रवार को चित्रकूट मंडल में पर्यटन, संस्कृति व धर्मार्थ कार्य विभाग की प्रस्तावित व निर्माणाधीन योजनाओं की समीक्षा की। वित्तीय वर्ष 2026-27 में 84 करोड़ रुपये से ज्यादा की अनुमानित लागत वाली 31 परियोजनाओं पर चर्चा हुई। इनमें पर्यटन विभाग की 27 परियोजनाएं शामिल हैं।
चित्रकूट में सबसे ज्यादा 15 प्रोजेक्ट
पर्यटन विभाग की 27 परियोजनाओं में सबसे ज्यादा 15 चित्रकूट की हैं। इसके अलावा बांदा की छह, हमीरपुर की तीन व महोबा की तीन परियोजनाएं शामिल हैं। इनका फोकस प्रमुख धार्मिक स्थलों के विकास, पर्यटकों के लिए सुविधाएं बढ़ाने व धार्मिक पर्यटन को बेहतर बनाने पर है।
तीन रास्तों पर बनेंगे भव्य प्रवेश द्वार
चित्रकूट में प्रयागराज-चित्रकूट, बांदा-चित्रकूट व कौशांबी-चित्रकूट मार्ग पर Theme Based प्रवेश द्वार बनाए जाने का प्रस्ताव है। इसके साथ बेरी पुलिया से शंख चौक तक Tourism Development का काम होगा। इन योजनाओं से चित्रकूट पहुंचने वाले पर्यटकों को शहर की धार्मिक व सांस्कृतिक पहचान का अलग अनुभव देने की तैयारी है।
रामघाट से तुलसी घाट तक बदलेगा लुक
रामघाट पर कथा स्थल, तुलसी घाट पर आरती स्थल, प्राणु बाबा आश्रम, मानिकपुर के लैना बाबा मंदिर व मारी माता मंदिर के विकास की योजना भी समीक्षा में शामिल रही। बोड़ी पोखरी में High Mast Light लगाने के साथ सौंदर्यीकरण का काम प्रस्तावित है। इन प्रोजेक्ट के जरिए प्रमुख धार्मिक स्थलों पर पर्यटक सुविधाओं को बेहतर करने की तैयारी है।
8 करोड़ का ‘परंपरा’ सेंटर बनेगा खास आकर्षण
करीब 8 करोड़ रुपये की लागत से ‘परंपरा’ वन स्टॉप सेंटर फॉर टूरिज्म एंड कल्चर बनाने का प्रस्ताव है। यहां चित्रकूट की सांस्कृतिक व आध्यात्मिक विरासत को एक जगह पेश किया जाएगा। पर्यटकों को Tourism Information के साथ दूसरी जरूरी सुविधाएं भी इसी सेंटर पर मिल सकेंगी। इसे पर्यटन, संस्कृति व Visitor Services के Integrated Center के तौर पर विकसित करने की योजना है।

मंत्री ने समय पर काम पूरा करने को कहा
जयवीर सिंह ने कहा कि पर्यटन प्रोजेक्ट का मकसद सिर्फ निर्माण कराना नहीं होना चाहिए। हर जगह की धार्मिक व सांस्कृतिक पहचान को बचाते हुए पर्यटकों के Experience को बेहतर करना जरूरी है। उन्होंने एक करोड़ रुपये तक की लागत वाले सभी निर्माणाधीन प्रोजेक्ट नवंबर तक हर हाल में पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने Quality, Time Bound Work व जनप्रतिनिधियों के साथ बेहतर Coordination पर भी जोर दिया।
बांदा में मंदिरों के साथ Interpretation Center
बांदा की छह परियोजनाओं में तिंदवारी के खासी बाबा मंदिर व हनुमान मंदिर, नरैनी के प्राचीन बीरगढ़ माता मंदिर के विकास की योजनाएं शामिल हैं। बांदा के श्री राम जानकी मंदिर में Interpretation Center बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया है। इन कामों का मकसद धार्मिक स्थलों पर पहुंचने वाले लोगों को बेहतर सुविधाएं देना है।
महोबा में मंदिरों से मस्तानी महल तक विकास
महोबा में कालेश्वर मंदिर, चरखारी के गोरैया माता मंदिर व ऐतिहासिक मस्तानी महल के संरक्षण व विकास से जुड़े प्रस्तावों की समीक्षा हुई। इन स्थलों पर सुविधाएं बढ़ाने के साथ उनकी ऐतिहासिक पहचान को सुरक्षित रखने पर जोर दिया गया। हमीरपुर में काली मंदिर, राठ स्थित महेश्वरी माता मंदिर व मां महाकाली सिद्धपीठ के विकास की योजनाओं पर चर्चा हुई। धार्मिक स्थलों पर पर्यटकों की सुविधा बढ़ाने से जुड़े कामों को भी प्रोजेक्ट में शामिल किया गया है।
पुरानी सांस्कृतिक धरोहरों की भी होगी देखरेख
संस्कृति विभाग की निर्माणाधीन योजनाओं में चित्रकूट के रामलीला परिसर का सौंदर्यीकरण व राम जानकी मंदिर स्थित रामलीला मंच का विकास शामिल है। इसके अलावा सोमनाथ मंदिर, खाकरा मठ, शांतिनाथ मंदिर, योगिनी माता मंदिर व महोबा के एक प्राचीन मंदिर के संरक्षण व अनुरक्षण से जुड़े प्रस्ताव भी रखे गए।
बड़ी भवानी मंदिर के काम की भी समीक्षा
धर्मार्थ कार्य विभाग की ओर से चित्रकूट स्थित बड़ी भवानी मंदिर के अनुरक्षण कार्यों की प्रोग्रेस देखी गई। महोबा के इमिलिया डांग गांव स्थित प्राचीन मंदिर, गुमान बिहारी मंदिर व वासुदेव मंदिर के संरक्षण व विकास से जुड़े प्रस्तावों पर भी बैठक में चर्चा हुई।
निर्माणाधीन प्रोजेक्ट की ग्राउंड रिपोर्ट पर जोर
बैठक में वर्ष 2024-25 व 2025-26 में स्वीकृत पर्यटन, संस्कृति व धर्मार्थ कार्य विभाग की निर्माणाधीन परियोजनाओं की प्रोग्रेस भी देखी गई। मंत्री ने अधिकारियों को नियमित Site Inspection करने व प्रोजेक्ट की लगातार निगरानी के निर्देश दिए। उन्होंने सभी काम तय समय सीमा में Quality Standards के मुताबिक पूरा कराने को कहा।






