लखनऊ, 7 जून 2026:
यूपी की रेलवे सुरक्षा व्यवस्था और अधिक आधुनिक और तकनीक-सक्षम बनेगी। इस संबंध में सीएम योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं। उन्होंने किया है कि रेलवे नेटवर्क में अपराध और असामाजिक गतिविधियों के लिए कोई स्थान नहीं है। प्रदेश में प्रतिदिन लाखों यात्री रेल सेवाओं का उपयोग करते हैं। इसलिए यात्रियों की सुरक्षा, महिला सम्मान, अपराध नियंत्रण और त्वरित पुलिस सहायता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) के कार्यों की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने रेलवे परिसरों, प्लेटफॉर्मों और ट्रेनों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए आधुनिक तकनीक के अधिकतम उपयोग पर बल दिया। उन्होंने जीरो टॉलरेंस नीति को पूरी कठोरता के साथ लागू करने के निर्देश दिए।
बैठक में डीजी रेलवे ने बताया कि वर्ष 1867 में स्थापित यूपी जीआरपी वर्तमान में छह अनुभागों, 65 थानों और 89 अस्थायी चौकियों के माध्यम से कार्य कर रही है। प्रतिदिन 3031 से अधिक ट्रेनों, करीब 1550 रेलवे स्टेशनों और 30 लाख से अधिक यात्रियों की सुरक्षा का दायित्व जीआरपी के पास है।
रेलवे ट्रैक और ट्रेनों की सुरक्षा की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने रेलवे प्रशासन, आरपीएफ और स्थानीय पुलिस के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया। अधिकारियों ने बताया कि संयुक्त गश्त, ड्रोन और सीसीटीवी आधारित निगरानी, डिजिटल सत्यापन, निरीक्षण एप के माध्यम से संदिग्धों की जांच, मुखबिर तंत्र को मजबूत करने तथा कबाड़ बाजारों की निगरानी जैसे कदम लगातार उठाए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने ट्रेनों और रेलवे परिसरों में पत्थरबाजी की घटनाओं को पूरी तरह समाप्त करने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि सुरक्षा चौपाल, जनजागरूकता कार्यक्रम, युवाओं और अभिभावकों की काउंसिलिंग, रेल मित्र नेटवर्क और त्वरित अभियोजन जैसी पहलों से विभिन्न रेल मंडलों में ऐसी घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है।
त्योहारों, भर्ती परीक्षाओं और बड़े आयोजनों के दौरान रेलवे स्टेशनों पर भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि यात्रियों को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। प्रवेश-निकास नियंत्रण, कतार प्रबंधन, सार्वजनिक घोषणाओं और 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।
महिला सुरक्षा, मानव तस्करी रोकने और गुमशुदा बच्चों की तलाश को भी मुख्यमंत्री ने प्राथमिकता में रखा। अधिकारियों ने बताया कि ऑपरेशन मुस्कान के तहत एक जनवरी से 26 मई 2026 तक 860 बच्चों को तलाशा गया, जबकि विभिन्न अभियानों के माध्यम से अब तक 2325 लोगों को उनके परिवारों से मिलाया गया है। मुख्यमंत्री ने वर्ष 2027 में प्रस्तावित हरिद्वार अर्धकुंभ के लिए अभी से व्यापक सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन योजना तैयार करने के निर्देश भी दिए।






