
योगेंद्र मलिक
पौड़ी गढ़वाल, 29 जून 2026ः
प्रमुख सचिव दिलीप जावलकर ने नयार नदी पुनर्जीवन के लिए तैयार विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि डीपीआर एक सप्ताह के भीतर शासन को भेजी जाए। साथ ही कहा कि सभी जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण जियोटैग लोकेशन के आधार पर किया जाए। जलागम विभाग के उप निदेशक ने पावर प्वाइंट प्रस्तुतीकरण के माध्यम से परियोजना का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया।
प्रमुख सचिव ने सोमवार को कलेक्ट्रेट में जल स्रोत एवं नदी पुनर्जीवन प्राधिकरण (सारा) की बैठक में कहा कि नयार घाटी जनपद की पेयजल, सिंचाई एवं ग्रामीण आजीविका का प्रमुख आधार रही है। ऐसे में नदी और उससे जुड़े जल स्रोतों का संरक्षण पर्यावरणीय आवश्यकता के साथ-साथ सामाजिक एवं आर्थिक विकास की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि नदी पुनर्जीवन योजना के माध्यम से सूखते जल स्रोतों को पुनर्जीवित कर क्षेत्र की दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
उन्होंने बताया कि परियोजना के तहत जलागम आधारित उपचार, कंटूर ट्रेंच, तालाब एवं चेकडैम निर्माण, माइक्रोप्लानिंग, जियोटैगिंग और डिजिटल मॉनिटरिंग जैसे वैज्ञानिक उपाय अपनाए जाएंगे। इन प्रयासों से वर्षा जल का बेहतर संरक्षण होगा, भूजल स्तर में सुधार आएगा, मृदा अपरदन पर नियंत्रण मिलेगा और नदी तंत्र का पारिस्थितिक संतुलन सुदृढ़ होगा। प्रमुख सचिव ने निर्देश दिए कि सभी जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण जियोटैग लोकेशन के आधार पर किया जाए, जिससे कार्यों की गुणवत्ता, पारदर्शिता और प्रभावशीलता सुनिश्चित हो सके।
दिलीप जावलकर ने वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप नियमित मॉनिटरिंग, जल स्तर के आकलन और चरणबद्ध माइक्रोप्लान तैयार करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने सीडीओ अशोक जोशी को पूर्वी एवं पश्चिमी नयार क्षेत्र में प्रस्तावित कार्यों का समेकित व अद्यतन डाटा तैयार कराने और विभिन्न विभागों द्वारा किए गए सर्वेक्षणों की जानकारी संकलित करने के निर्देश दिए। साथ ही चेकडैमों की गुणवत्ता में सुधार, नियमित निरीक्षण और उनके आसपास पौधारोपण सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने जल संरक्षण गतिविधियों में स्थानीय समुदाय, स्वयंसेवी संगठनों और इच्छुक नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी विशेष बल दिया।
उन्होंने बैठक के बाद पुराने कलेक्ट्रेट भवन को हेरिटेज भवन के रूप में विकसित किए जा रहे कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने कार्यदायी संस्था को निर्माण कार्य गुणवत्ता मानकों के अनुरूप एवं समयबद्ध ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही भवन की ऐतिहासिक पहचान और मूल स्वरूप को संरक्षित रखने पर विशेष ध्यान देने को कहा। बैठक में विभागों से संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।






