
लखनऊ, 2 जुलाई 2026:
यूपी में सरकार की वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने की नीति अब जमीनी स्तर पर सकारात्मक परिणाम देती नजर आ रही है। बेहतर पर्यटन सुविधाओं, प्रभावी वन प्रबंधन और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण के लिए किए गए लगातार प्रयासों का असर प्रदेश के प्रमुख वन्यजीव पर्यटन स्थलों पर स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
इसका सबसे बड़ा उदाहरण कतर्नियाघाट वन्य जीव विहार है। यहां पर्यटन सत्र 2025-26 (नवंबर 2025 से जून 2026) के दौरान 12 हजार से अधिक पर्यटकों ने भ्रमण किया और विभाग को 24 लाख रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ।
आंकड़ों के अनुसार इस पर्यटन सत्र में 12,298 भारतीय तथा 33 विदेशी पर्यटकों सहित 12,331 पर्यटक कतर्नियाघाट पहुंचे। इस दौरान वन विभाग को 24,00,337 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। यह दर्शाता है कि प्रदेश में प्रकृति आधारित पर्यटन के प्रति लोगों का विश्वास लगातार बढ़ रहा है और कतर्नियाघाट देश-विदेश के पर्यटकों के लिए तेजी से पसंदीदा गंतव्य बन रहा है।

पर्यटकों की संख्या के लिहाज से इस साल जनवरी सबसे व्यस्त महीना रहा। इस दौरान सर्वाधिक 2,980 पर्यटक कतर्नियाघाट पहुंचे। वहीं राजस्व के मामले में नवंबर 2025 सबसे सफल महीना साबित हुआ जब विभाग को 4,78,484 रुपये की आय हुई। दिसंबर में 1,944 पर्यटक आए और 3,75,469 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। मार्च में 1,729 पर्यटकों के आगमन से 2,95,784 रुपये की आय दर्ज की गई।
फरवरी में 701 पर्यटकों ने भ्रमण किया। इससे 1,33,494 रुपये का राजस्व मिला। अप्रैल में 887 पर्यटक पहुंचे और 1,94,144 रुपये की आय हुई। मई में 1,349 पर्यटकों से 2,04,245 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। वहीं पर्यटन सत्र के अंतिम महीने जून में 1,694 पर्यटकों ने कतर्नियाघाट का भ्रमण किया और विभाग को 2,96,740 रुपये का राजस्व मिला।

वन एवं पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि यूपी सरकार द्वारा इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने, पर्यटकों के लिए मूलभूत सुविधाओं का विस्तार, वन्यजीव संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग पर दिए जा रहे विशेष जोर का परिणाम है कि कतर्नियाघाट वन्य जीव विहार की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। आगे यहां पर्यटकों की संख्या और राजस्व दोनों में और अधिक वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है।






