
योगेंद्र मलिक
देहरादून, 2 जुलाई 2026:
मानसून के दौरान किसी भी प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए देहरादून में गुरुवार सुबह बड़े स्तर पर मॉक ड्रिल की गई। जिले के सात अलग-अलग स्थानों पर भूस्खलन, सड़क बंद होने, बाढ़ जैसे हालात बनाकर जिला प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, स्वास्थ्य विभाग, अग्निशमन, लोक निर्माण विभाग समेत कई एजेंसियों ने संयुक्त रूप से राहत-बचाव अभियान का अभ्यास किया।
मॉक ड्रिल के दौरान Disaster Management सिस्टम की तैयारी, विभागों के बीच तालमेल, संसाधनों की उपलब्धता और Rescue Response की क्षमता को परखा गया। लंबीधार-किमाड़ी मोटर मार्ग पर पहले परिदृश्य में भारी बारिश के बाद भूस्खलन होने की स्थिति बनाई गई।

मॉक ड्रिल के मुताबिक एक यात्री बस मलबे में दब गई, जबकि दूसरा वाहन करीब 35 मीटर गहरी ढलान में जा गिरा। करीब 20 लोगों के प्रभावित होने की सूचना मिलते ही आपदा कंट्रोल रूम ने उपजिलाधिकारी मसूरी और संबंधित अधिकारियों को अलर्ट किया। इसके बाद राहत टीमों ने मौके पर पहुंचकर घायलों को बाहर निकालने, प्राथमिक इलाज देने, अस्पताल पहुंचाने का अभ्यास किया।

दूसरा सीन में चकराता-त्यूनी मोटर मार्ग पर धारनाधार के पास भारी भूस्खलन और बोल्डर गिरने से सड़क बंद होने का तैयार किया गया। दोनों तरफ कई यात्री वाहन, स्थानीय परिवहन वाहन, जरूरी सामान लेकर जा रहे ट्रक फंसे होने का दृश्य बनाया गया। इंसिडेंट कमांडर के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्ग-707ए पर आठ से दस वाहन प्रभावित हुए, जबकि एक वाहन पर बोल्डर गिरने से दो लोग घायल हो गए। सूचना मिलते ही Rescue टीम मौके पर पहुंची, घायलों को सुरक्षित निकाला गया। जेसीबी समेत अन्य मशीनों से सड़क खोलने का भी अभ्यास किया गया।
तीसरे खास रिहर्सल में लगातार बारिश के कारण रिस्पना, गंगा, चंद्रभागा, सुसवा और सोंग नदियों का जलस्तर बढ़ने की स्थिति बनाई गई। गौहरी माफी क्षेत्र में बाढ़ का पानी घुसने से सड़कें और छोटे पुल जलमग्न होने, कई परिवारों के फंसने का परिदृश्य तैयार किया गया। इस दौरान राहत टीमों ने नावों की मदद से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया, राहत शिविर स्थापित किए, मेडिकल सहायता उपलब्ध कराने, पशुओं को सुरक्षित निकालने और नदी के जलस्तर की निगरानी का अभ्यास किया।

पूरे रिहर्सल के दौरान जिला आपदा नियंत्रण कक्ष से सभी घटनास्थलों की लगातार निगरानी की गई। अलग-अलग विभागों के बीच सूचना साझा करने, संसाधनों की तैनाती, राहत कार्यों की गति और आपसी समन्वय को भी परखा गया। अधिकारियों के मुताबिक ऐसे अभ्यास का मकसद वास्तविक आपदा की स्थिति में कम समय में प्रभावी राहत-बचाव अभियान चलाने के लिए सभी एजेंसियों को पूरी तरह तैयार रखना है।






