Uttarakhand

Highway संग Wildlife भी सुरक्षित, फोर लेन में हाथियों की सुरक्षा को बनेंगे खास अंडरपास

देहरादून, जॉलीग्रांट एयरपोर्ट और ऋषिकेश के बीच बनने वाले करीब 20 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर पर 743 करोड़ रुपये खर्च होंगे, वन क्षेत्र में सड़क का दायरा घटाकर सिर्फ 23 मीटर रखा गया, 754 पेड़ों का ट्रांसप्लांटेशन होगा, वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए कई आधुनिक इंतजाम किए जाएंगे

देहरादून, 8 जुलाई 2026:

उत्तराखंड में देहरादून, जॉलीग्रांट एयरपोर्ट और ऋषिकेश के बीच सफर को आसान, तेज और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ी सड़क परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) भानियावाला-जॉलीग्रांट-ऋषिकेश मार्ग को फोर और जरूरत वाले हिस्सों में सिक्स लेन के रूप में विकसित कर रहा है। करीब 20 किलोमीटर लंबी इस परियोजना पर 743 करोड़ रुपये की लागत आएगी। यह काम हाइब्रिड एन्युटी मोड (Hybrid Annuity Mode) के तहत किया जा रहा है।

परियोजना का मकसद सिर्फ ट्रैफिक कम करना नहीं है, बल्कि चारधाम यात्रा, पर्यटन, एयरपोर्ट कनेक्टिविटी और भविष्य की परिवहन जरूरतों को भी ध्यान में रखते हुए एक आधुनिक Highway तैयार करना है।
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इस परियोजना की सबसे खास बात यह है कि सड़क निर्माण के साथ Forest Conservation और Wildlife Protection को बराबर प्राथमिकता दी गई है। सड़क का डिजाइन तैयार करते समय पर्यावरण पर असर कम करने के लिए कई बदलाव किए गए हैं ताकि विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बना रहे।

लगातार बढ़ रहा ट्रैफिक, इसलिए जरूरी हुआ फोर लेन

भानियावाला से ऋषिकेश तक मौजूदा दो लेन सड़क पर हर दिन करीब 18,456 वाहन गुजरते हैं, जो लगभग 15,088 पैसेंजर कार यूनिट (PCU) के बराबर है। जॉलीग्रांट एयरपोर्ट पर बढ़ती उड़ानों, पर्यटन गतिविधियों और चारधाम यात्रा के चलते आने वाले वर्षों में इस मार्ग पर वाहनों की संख्या और बढ़ने का अनुमान है। मौजूदा सड़क घने जंगलों के बीच से गुजरती है और कई जगह तीखे मोड़ हैं। भारी वाहनों, बसों और ट्रकों की लगातार आवाजाही से अक्सर जाम लगता है और सड़क हादसों का खतरा भी बना रहता है। ऐसे में फोर लेन सड़क बनने से ट्रैफिक का दबाव कम होगा, सड़क की ज्यामिति बेहतर होगी और वाहन अधिक सुरक्षित तरीके से गुजर सकेंगे। इससे स्थानीय लोगों के साथ पर्यटकों को भी राहत मिलेगी।

पेड़ों की कटाई कम करने के लिए बदला गया पूरा प्लान

सामान्य तौर पर राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में 60 मीटर का राइट ऑफ वे (ROW) रखा जाता है, लेकिन इस परियोजना में वन क्षेत्र को बचाने के लिए इसे घटाकर सिर्फ 23 मीटर कर दिया गया है। इससे बड़ी संख्या में पेड़ों को बचाया जा सकेगा और जंगल पर पड़ने वाला असर काफी कम होगा। इसके अलावा फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (FRI) के वैज्ञानिकों ने विस्तृत अध्ययन के बाद 754 पेड़ों को ट्रांसप्लांटेशन के लिए उपयुक्त माना है। इन पेड़ों को मानसून के दौरान दूसरी जगह स्थानांतरित किया जाएगा ताकि हरियाली को अधिकतम बचाया जा सके। NHAI का कहना है कि सड़क निर्माण के साथ पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी भी पूरी गंभीरता से निभाई जाएगी।

Wildlife Protection को बनाया गया परियोजना का अहम हिस्सा

यह मार्ग बड़कोट, ऋषिकेश और थानो वन रेंज जैसे संवेदनशील जंगलों से होकर गुजरता है। इन इलाकों में हाथियों समेत कई वन्यजीवों की आवाजाही रहती है। इसी वजह से परियोजना में Wildlife Mitigation पर विशेष ध्यान दिया गया है। उत्तराखंड वन विभाग, WWF-India और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WWI), देहरादून की तकनीकी सलाह के आधार पर कई सुरक्षा उपाय किए जा रहे हैं। इनमें एक बड़ा ब्रिज-कम-एलीफेंट अंडरपास, चार समर्पित एलीफेंट अंडरपास, ग्रीन गाइड हेज, साउंड बैरियर, एंटी-ग्लेयर स्क्रीन, वन्यजीव चेतावनी, संकेतक, स्पीड कंट्रोल सिस्टम और नो हॉर्न जोन शामिल हैं।

इन व्यवस्थाओं का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सड़क बनने के बाद भी हाथियों और दूसरे वन्यजीवों की प्राकृतिक आवाजाही बाधित न हो। साथ ही मानव और वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में भी कमी लाई जा सके।

पांच साल में 29 वन्यजीवों की गई जान

वन विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक ऋषिकेश और बड़कोट वन रेंज के बीच मौजूदा दो लेन सड़क पर पिछले पांच वर्षों में सड़क हादसों के कारण 29 वन्यजीवों की मौत दर्ज की गई है। इनमें कई ऐसे मामले शामिल हैं जहां सड़क पार करते समय वन्यजीव तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आ गए। इसी समस्या का समाधान निकालने के लिए इस परियोजना में करीब 3.5 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड संरचना तैयार की जा रही है। इसके साथ हाथियों की सुरक्षित आवाजाही के लिए विशेष एलीफेंट अंडरपास बनाए जाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वन्यजीवों की जान बचाने के साथ सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी।

सभी कानूनी और पर्यावरणीय मंजूरियों के बाद शुरू हुआ निर्माण

एनएचएआई के अनुसार परियोजना शुरू करने से पहले सभी जरूरी वैधानिक और पर्यावरणीय मंजूरियां ली गई हैं। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने भी अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि पेड़ों की कटाई पर कोई प्रभावी रोक लागू नहीं है। इसके बाद राज्य सरकार ने तय पर्यावरणीय शर्तों के साथ पेड़ों की कटाई और ट्रांसप्लांटेशन की वर्किंग परमिशन जारी की। प्राधिकरण का कहना है कि निर्माण कार्य सभी कानूनी नियमों और पर्यावरणीय मानकों का पालन करते हुए किया जा रहा है। परियोजना के हर चरण में संबंधित विभागों की निगरानी और तकनीकी सलाह भी ली जा रही है।

चारधाम यात्रा और पर्यटन को मिलेगा बड़ा फायदा

यह सड़क उत्तराखंड की सबसे व्यस्त सड़कों में शामिल है। देहरादून से जॉलीग्रांट एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों के अलावा ऋषिकेश और चारधाम यात्रा पर जाने वाले लाखों श्रद्धालु भी इसी मार्ग का इस्तेमाल करते हैं। पर्यटन सीजन और यात्रा काल में अक्सर लंबा जाम लग जाता है, जिससे लोगों को घंटों तक फंसना पड़ता है।

फोर लेन बनने के बाद यात्रा का समय कम होगा, ट्रैफिक सुचारु रहेगा और एयरपोर्ट तक पहुंचना भी आसान होगा। भविष्य में यदि इस मार्ग पर ट्रैफिक और बढ़ता है तो नई सड़क उसे संभालने में सक्षम होगी। बेहतर कैरिजवे और आधुनिक सड़क सुरक्षा सुविधाओं से दुर्घटनाओं में भी कमी आने की उम्मीद है।

परियोजना के पूरा होने के बाद देहरादून, जॉलीग्रांट एयरपोर्ट और ऋषिकेश के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी। स्थानीय लोगों, पर्यटकों, चारधाम यात्रियों और व्यावसायिक वाहनों को बेहतर सड़क सुविधा मिलेगी। साथ ही यह परियोजना आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीव सुरक्षा को एक साथ लेकर चलने वाले मॉडल के रूप में भी देखी जा रही है।

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