
देहरादून, 14 जुलाई 2026:
देहरादून के हर्रावाला रेलवे स्टेशन से सोमवार को सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के मौके पर वेरावल के लिए विशेष रेल यात्रा की शुरुआत हुई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरी झंडी दिखाकर ट्रेन को रवाना किया। इस छह दिवसीय यात्रा में उत्तराखंड के अलग-अलग जिलों से करीब 700 श्रद्धालु शामिल हुए। इनमें स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं, सरकारी योजनाओं के लाभार्थी, संत समाज के प्रतिनिधि और समाज के विभिन्न वर्गों के लोग शामिल हैं।
यात्रा को बताया सांस्कृतिक चेतना से जुड़ने का अवसर
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सिर्फ धार्मिक यात्रा नहीं है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत, सनातन परंपरा और राष्ट्रीय स्वाभिमान को करीब से महसूस करने का मौका भी है। उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर देश की अटूट आस्था और मजबूत संकल्प का प्रतीक है। इतिहास में कई बार हमलों का सामना करने के बावजूद सोमनाथ का फिर से खड़ा होना भारत की ताकत और आत्मविश्वास का संदेश देता है।

उन्होंने यात्रा पर निकले सभी श्रद्धालुओं के सुरक्षित और सुखद सफर की कामना करते हुए कहा कि यह आयोजन लोगों को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ने का भी माध्यम बनेगा।
सोमनाथ से केदारनाथ तक सांस्कृतिक विरासत पर फोकस
धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में सांस्कृतिक विरासत से जुड़े बड़े काम हो रहे हैं। अयोध्या, काशी विश्वनाथ, केदारनाथ, महाकाल, बद्रीनाथ और सोमनाथ जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों का विकास उसी सोच का हिस्सा है। उनका कहना था कि मंदिर केवल पूजा के स्थान नहीं हैं, बल्कि भारत की सभ्यता, संस्कृति और इतिहास की पहचान भी हैं। लंबे समय तक जिन धरोहरों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया, अब उन्हें नई पहचान मिल रही है।

उत्तराखंड को Spiritual Capital बनाने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार देवभूमि उत्तराखंड को दुनिया की आध्यात्मिक राजधानी बनाने के लक्ष्य पर लगातार काम कर रही है। इसके लिए केदारखंड और मानसखंड में मंदिरों के विकास और सौंदर्यीकरण का काम चल रहा है। हरिपुर कालसी स्थित यमुनातीर्थ के पुनरुद्धार की योजना पर भी काम हो रहा है।
उन्होंने बताया कि हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर और शारदा कॉरिडोर जैसी बड़ी परियोजनाओं को भी आगे बढ़ाया जा रहा है। भारतीय संस्कृति, दर्शन और इतिहास पर रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए दून विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर हिन्दू स्टडीज की स्थापना भी की गई है।
कानून व्यवस्था और सांस्कृतिक पहचान का भी किया जिक्र
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने के लिए कई फैसले ले चुकी है। उन्होंने धर्मांतरण विरोधी कानून और दंगारोधी कानून का उल्लेख करते हुए कहा कि इनका उद्देश्य राज्य की मूल पहचान को बनाए रखना है।

उन्होंने बताया कि सरकारी जमीनों पर चलाए गए अभियान के दौरान 13 हजार एकड़ से ज्यादा भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है। उनके मुताबिक यह सिर्फ जमीन खाली कराने की कार्रवाई नहीं, बल्कि देवभूमि की सांस्कृतिक विरासत की रक्षा का प्रयास भी है।
समान नागरिक संहिता और शिक्षा सुधार पर भी बोले
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू कर सभी नागरिकों के लिए समान कानून और समान न्याय व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि 250 से ज्यादा अवैध मदरसों को सील किया गया है। साथ ही मदरसा बोर्ड की जगह उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया गया है, ताकि शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाया जा सके।

यात्रियों से किया खास आग्रह
धामी ने यात्रा पर जा रहे श्रद्धालुओं से कहा कि वे जहां भी जाएं, वहां उत्तराखंड की संस्कृति, संस्कार और अतिथि देवो भवः की परंपरा का परिचय दें। उन्होंने कहा कि सभी यात्री केवल सोमनाथ के दर्शन के लिए नहीं जा रहे, बल्कि देवभूमि की पहचान और उसकी सकारात्मक छवि के प्रतिनिधि बनकर भी यात्रा कर रहे हैं। कार्यक्रम में विधायक बृज भूषण गैरोला, देहरादून के मेयर सौरभ थपलियाल समेत कई जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे।






