
लखनऊ, 23 जुलाई 2026:
यूपी में न्याय व्यवस्था को अधिक वैज्ञानिक, पारदर्शी और साक्ष्य आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। प्रदेश के कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं तथा लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश राज्य फॉरेंसिक विज्ञान संस्थान के बीच शैक्षणिक सहयोग, अनुसंधान और क्षमता निर्माण के लिए महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस पहल से प्रदेश के कारागार प्रशासन में आधुनिक फॉरेंसिक तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ेगा। वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रोत्साहन मिलेगा और अधिकारियों-कर्मचारियों की कार्यकुशलता में गुणात्मक सुधार होगा।
एमओयू पर महानिदेशक कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं पीसी मीना तथा उत्तर प्रदेश राज्य फॉरेंसिक विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर दोनों अधिकारियों ने इसे उत्तर प्रदेश की न्याय प्रणाली को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी और आधुनिक बनाने की दिशा में ऐतिहासिक पहल बताया।
डॉ. गोस्वामी ने कहा कि प्रदेश में फॉरेंसिक क्षमताओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है। आज के दौर में वैज्ञानिक साक्ष्यों का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। फॉरेंसिक विज्ञान न केवल निर्दोषों को न्याय दिलाने में सहायक है बल्कि अपराधियों के विरुद्ध ठोस और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने का सबसे विश्वसनीय माध्यम भी बन चुका है।
इस समझौते के तहत दोनों संस्थान संयुक्त रूप से प्रशिक्षण कार्यक्रम, अनुसंधान परियोजनाएं, कार्यशालाएं, विशेषज्ञ व्याख्यान, इंटर्नशिप, पाठ्यक्रम विकास और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों का संचालन करेंगे। इससे कारागार विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की वैज्ञानिक समझ, तकनीकी दक्षता तथा अनुसंधान आधारित कार्य संस्कृति को नई मजबूती मिलेगी। आधुनिक फॉरेंसिक तकनीकों का प्रशिक्षण जेल प्रशासन को अधिक पेशेवर, उत्तरदायी और साक्ष्य आधारित निर्णय लेने में सक्षम बनाएगा।
महानिदेशक कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं पीसी मीना ने कहा कि यह एमओयू दोनों संस्थानों के लिए मील का पत्थर साबित होगा। इसके माध्यम से कारागार प्रशासन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अनुसंधान आधारित निर्णय प्रक्रिया और आधुनिक प्रशिक्षण व्यवस्था को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि उत्तर प्रदेश राज्य फॉरेंसिक विज्ञान संस्थान के सहयोग से अधिकारियों का कौशल विकास, नवाचार और क्षमता निर्माण और अधिक मजबूत होगा। इससे प्रदेश की न्याय प्रणाली को नई गति मिलेगी।
इस साझेदारी को प्रदेश में वैज्ञानिक जांच और न्याय व्यवस्था को नई मजबूती देने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इस अवसर पर एडीजी कारागार धर्मेन्द्र सिंह, डीआईजी हेमराज मीणा, डीआईजी प्रदीप गुप्ता, सुभाष शाक्य, पीएन पाण्डेय, डॉ. रामधनी, वित्त नियंत्रक आबिद अंसारी, वरिष्ठ अधीक्षक रंगबहादुर पटेल, डॉ. हबीब, पीआरओ अंकित कुमार, संतोष तिवारी सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे।






