नौकरी-लोन का झांसा देकर ऑनलाइन खुलवाते थे बैंक खाते, गिरोह के दो बदमाश गिरफ्तार
उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स ने अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का किया भंडाफोड़, सोशल मीडिया पर देते थे विज्ञापन, साइबर ठगी के मामलों में खातों का करते थे इस्तेमाल, आरोपियों का था पूरा कंट्रोल, साक्ष्य बरामद

राजकिशोर तिवारी
देहरादून, 24 जुलाई 2026ः
उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स ने एक अंतरराज्यीय साइबर गिरोह के दो बदमाशों को गिरफ्तार किया है। आरोपी नौकरी और लोन दिलाने का झांसा देकर लोगों के नाम पर ऑनलाइन बैंक खाते खुलवाते थे और बाद में उन्हीं खातों का इस्तेमाल ओएलएक्स सहित विभिन्न साइबर ठगी के मामलों में करते थे। एक आरोपी राजस्थान और दूसरा लखनऊ का रहने वाला है।
एसटीएफ के अनुसार एनसीआरपी पोर्टल पर दर्ज साइबर शिकायतों के विश्लेषण और तकनीकी निगरानी के दौरान इंडसइंड बैंक के एक संदिग्ध खाते का पता चला। जांच में सामने आया कि यह खाता कई वित्तीय साइबर अपराधों में इस्तेमाल हो रहा था। डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर टीम ने आशारोड़ी चेकपोस्ट पर राजस्थान नंबर की एक स्कॉर्पियो को रोककर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया।
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे फेसबुक व इंस्टाग्राम पर निजी कंपनियों में नौकरी और आसान लोन दिलाने के नाम पर विज्ञापन चलाते थे। इच्छुक लोगों से वाट्सएप पर संपर्क कर उनके नाम से ऑनलाइन बैंक खाते खुलवाए जाते थे, जबकि उन खातों का मोबाइल नंबर, इंटरनेट बैंकिंग और पूरा नियंत्रण आरोपी अपने पास रखते थे। डाक से एटीएम कार्ड और चेकबुक प्राप्त करने के बाद इन खातों का उपयोग ओएलएक्स पर फर्जी खरीद-बिक्री और अन्य साइबर ठगी से प्राप्त रकम को ट्रांसफर और निकालने में किया जाता था।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान राजस्थान के डींग निवासी राहुल मोहम्मद और मूल रूप से गोरखपुर निवासी व लखनऊ निवासी शिवांश उपाध्याय के रूप में हुई है। जांच में यह भी सामने आया कि राहुल मोहम्मद वर्ष 2024 में राजस्थान के एक साइबर ठगी के मामले में जेल जा चुका है। एसटीएफ ने आरोपियों के कब्जे से चार मोबाइल फोन, इंडसइंड बैंक की पांच बैंक किट (एटीएम कार्ड और चेकबुक सहित), एक आधार कार्ड, 15 हजार रुपये नकद और साइबर अपराध से जुड़े कई डिजिटल व दस्तावेजी साक्ष्य बरामद किए हैं। पुलिस ने दोनों के खिलाफ साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन देहरादून में मुकदमा दर्ज कराया है।






