
लखनऊ, 26 जुलाई 2026:
नीट पेपर लीक मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सीजेपी की ओर से आंदोलन समाप्त करने की घोषणा के बाद इसकी गूंज यूपी की राजनीति में भी सुनाई देने लगी है। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष एवं पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने इस पूरे घटनाक्रम को केवल एक आंदोलन की सफलता नहीं बल्कि व्यापक राजनीतिक बदलाव की शुरुआत करार दिया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी अपने बयान में अखिलेश यादव ने इसे ‘मनोबल और एकता की जीत’ बताते हुए सभी आंदोलनकारियों और उनके सहयोगियों को ‘बिग विन’ की बधाई दी। उन्होंने कहा कि युवाओं ने परीक्षा और शिक्षा की लड़ाई जीतकर अब संविधान, ईवीएम और चुनाव सुधार जैसे बड़े मुद्दों की ओर बढ़ने का रास्ता खोल दिया है।
अखिलेश ने अपने संदेश में भाजपा सरकार पर कई मोर्चों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की चुनावी गड़बड़ियों, जनप्रतिनिधियों की खरीद-फरोख्त, कथित कमीशनखोरी और सत्ता समर्थित मीडिया की भूमिका पर भी अब सवाल उठेंगे। इसके साथ ही उन्होंने बुलडोजर कार्रवाई, कथित फर्जी एनकाउंटर, महिलाओं और युवाओं की सुरक्षा, किसानों, मजदूरों, व्यापारियों के हित तथा सांप्रदायिक राजनीति जैसे मुद्दों को भी अपने बयान में प्रमुखता से जोड़ा।
सियासी जानकारों के मुताबिक अखिलेश यादव ने नीट आंदोलन की सफलता को शिक्षा के दायरे से निकालकर लोकतंत्र, संविधान और चुनावी सुधार जैसे व्यापक राजनीतिक विमर्श से जोड़ने की कोशिश की है। इसे विपक्ष के लिए एक नए राजनीतिक नैरेटिव के रूप में भी देखा जा रहा है। इसके जरिए युवाओं और विभिन्न सामाजिक वर्गों को एक साझा मुद्दे पर जोड़ने का प्रयास किया गया है।
स्पष्ट है कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सपा इस घटनाक्रम को भाजपा के खिलाफ राजनीतिक संदेश में बदलने की रणनीति पर काम कर रही है। इस पर राजनीतिक नजरें रहेंगी कि आने वाले समय में यह मुद्दा केवल शिक्षा तक सीमित रहेगा या व्यापक विपक्षी अभियान का आधार बनेगा।






