न्यूज डेस्क, 1 अगस्त 2026:
पीएम नरेंद्र मोदी ने इंस्टाग्राम लाइव के जरिए शुक्रवार देर रात देशवासियों, खासकर युवाओं और जेन-जी से सीधा संवाद करते हुए जंतर-मंतर पर हाल में हुई घटना को लेकर बड़ा और भावनात्मक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि इस घटना में उन्हें और उनकी दिवंगत मां को अपशब्द कहे गए लेकिन उनका उद्देश्य उन युवाओं को दंडित करना नहीं, बल्कि माफ कर सही रास्ता दिखाना है। प्रधानमंत्री ने समाज से भी अपील की कि गुमराह बच्चों को प्रताड़ित करने के बजाय उनका मार्गदर्शन किया जाए।
रात करीब 11 बजे प्रसारित अपने वीडियो संदेश की शुरुआत उन्होंने ‘हाय फ्रेंड्स, आज तो मन करता है बस आपसे ही बातें करूं’ कहकर की। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर जो कुछ हुआ उसे पूरे देश और दुनिया ने देखा। कुछ शरारती बच्चों ने ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया जो किसी भी सभ्य समाज के लिए स्वीकार्य नहीं हो सकती। हालांकि उन्होंने इस पूरे प्रकरण को केवल नाराजगी के नजरिए से नहीं अपितु सुधार के अवसर के रूप में देखने की बात कही।
पीएम ने कहा कि बचपन और युवावस्था में गलतियां होना स्वाभाविक है। यही वह समय होता है जब सही मार्गदर्शन देकर जीवन की दिशा बदली जा सकती है। उन्होंने माना कि इस घटना ने समाज को झकझोर दिया है। यह सवाल भी खड़ा किया है कि हमारी बेटियां इस तरह की भाषा कैसे बोल सकती हैं। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि ऐसे युवाओं को समाज से अलग करना समाधान नहीं है।
अपनी बात को सरल उदाहरण से समझाते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जैसे कभी-कभी दांतों के बीच जीभ आ जाती है और चोट लग जाती है लेकिन हम दांत नहीं तोड़ते क्योंकि दोनों हमारे अपने हैं। उसी तरह ये बच्चे भी हमारे हैं। उन्हें अदालतों के चक्कर कटवाने या सामाजिक प्रताड़ना देने से हालात नहीं बदलेंगे बल्कि उन्हें सही दिशा देने से सकारात्मक बदलाव आएगा।
पीएम मोदी ने युवाओं से अपनी गलतियों से सीखने और देश के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। देश का भविष्य युवाओं के हाथों में है। उनका सपना है कि हर युवा अपनी क्षमता का पूरा उपयोग करे और भारत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाए।
मालूम हो कि पिछले नौ दिनों में पीएम मोदी का इंस्टाग्राम पर यह पांचवां वीडियो संदेश है। हाल के सभी संदेशों में उन्होंने शिक्षा और परीक्षा प्रणाली में सुधार को प्रमुखता दी है। 30 जुलाई को उन्होंने पेपर लीक के खिलाफ सख्त कानून और संशोधन विधेयक का उल्लेख किया था। 26 जुलाई को परीक्षा सुधारों के लिए गठित छह सदस्यीय हाई-पावर टास्क फोर्स की जानकारी दी थी। वहीं 24 और 23 जुलाई के संदेशों में उन्होंने पेपर लीक को छात्रों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए सरकार की सुधारात्मक पहल और जनता से मिले सुझावों पर विस्तार से चर्चा की थी।






