
लखनऊ, 2 अगस्त 2026:
यूपी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए अनुशासनहीनता के आरोप में अपने समधी एवं पूर्व सांसद अशोक सिद्धार्थ को एक बार फिर पार्टी से निष्कासित कर दिया है। अशोक सिद्धार्थ बसपा के राष्ट्रीय समन्वयक थे। वे मायावती के भतीजे आकाश आनंद के ससुर हैं। अशोक दिल्ली, केरल, गुजरात और कर्नाटक समेत विभिन्न राज्यों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी लंबे संदेश में मायावती ने कहा कि अशोक सिद्धार्थ को पहले महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान टिकट वितरण और प्रदेश नेतृत्व के साथ तालमेल न बैठाने के कारण पार्टी से निकाला गया था। बाद में इस शर्त पर उन्हें वापस लिया गया कि वे भविष्य में अनुशासन का पालन करेंगे। उन्हें उत्तर प्रदेश से बाहर अन्य राज्यों में संगठन मजबूत करने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी।

मायावती ने आरोप लगाया कि चेतावनी के बावजूद अशोक सिद्धार्थ के कार्यशैली में कोई सुधार नहीं आया। कर्नाटक के अलावा ओडिशा और पश्चिम बंगाल से भी उनके खिलाफ लगातार अनुशासनहीनता और पार्टी निर्देशों की अनदेखी की शिकायतें मिलती रहीं। ऐसे में पार्टी और आंदोलन के हित को देखते हुए उन्हें सभी जिम्मेदारियों से मुक्त करने के बाद अब तत्काल प्रभाव से पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। मायावती ने स्पष्ट कर दिया कि भविष्य में उन्हें किसी भी स्थिति में दोबारा पार्टी में शामिल नहीं किया जाएगा।
बसपा प्रमुख ने सहारनपुर निवासी रणधीर सिंह बेनीवाल पर भी कार्रवाई करते हुए उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया। बेनीवाल को पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर की जिम्मेदारी सौंपी गई थी लेकिन उनके खिलाफ भी लगातार अनुशासनहीनता और पार्टी दिशा-निर्देशों के उल्लंघन की शिकायतें सामने आने की बात कही गई।
मायावती ने यह भी बताया कि हाल ही में हुए राष्ट्रीय स्तर के संगठनात्मक फेरबदल के तहत राज्यसभा सांसद रामजी गौतम को अन्य राज्यों के साथ पंजाब का प्रभारी बनाया गया है। उन्होंने साफ किया कि उत्तर प्रदेश के जो वरिष्ठ पदाधिकारी अन्य राज्यों में संगठन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं उन्हें अब यूपी में कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।
अपने संदेश के अंत में मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं से अफवाहों और साजिशों से सावधान रहने की अपील करते हुए कहा कि कुछ तत्व आगामी विधानसभा चुनाव अभियान को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मीडिया से भी अपील की कि वह भ्रामक और अपुष्ट खबरों के प्रसार से बचे तथा बसपा के खिलाफ किसी राजनीतिक षड्यंत्र का माध्यम न बने।






