
नई दिल्ली, 10 अगस्त 2026:
कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को अपने आवास पर मुलाकात की। बातचीत की शुरुआत में उन्होंने कहा कि पिछले 12-13 साल में अगर किसी वर्ग से सबसे ज्यादा मुलाकात हुई है तो वह खिलाड़ी हैं। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों की सफलता लाखों बच्चों को खेलों की तरफ बढ़ने की प्रेरणा देती है। उनका हर मेडल स्कूलों में दिए जाने वाले भाषणों से ज्यादा असर छोड़ता है।
खिलाड़ी ने सुनाया पाकिस्तान वाला किस्सा, बोले, नरेंद्र नाम से हो गई नफरत
मुलाकात के दौरान पुरुषों के 90 किलोग्राम से अधिक वर्ग में स्वर्ण पदक जीतने वाले मुक्केबाज नरेंद्र बेरवाल ने 2015 वर्ल्ड मिलिट्री गेम्स का दिलचस्प अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के खिलाड़ी के खिलाफ मुकाबला जीतने के बाद दोनों को चोट लग गई थी और अस्पताल में टांके लगवाने पड़े। खिलाड़ी ने बताया कि उनके कोच का नाम नरेंद्र राणा था, उनका अपना नाम भी नरेंद्र था, उसी समय देश के प्रधानमंत्री भी नरेंद्र मोदी थे। इस पर पाकिस्तान के खिलाड़ी ने मजाक में कहा कि भाईजान अब उसे नरेंद्र नाम से ही नफरत हो गई है। यह किस्सा सुनकर प्रधानमंत्री समेत मौजूद खिलाड़ी मुस्कुरा उठे।
कारगिल दिवस पर पाकिस्तान को 5-0 से हराने की कहानी भी सुनाई
महिला बॉक्सर साक्षी चौधरी ने बताया कि उनका मुकाबला कारगिल विजय दिवस के दिन पाकिस्तान की खिलाड़ी से था। वह भारतीय सेना से जुड़ी हैं, इसलिए उन्होंने पहले ही तय कर लिया था कि पाकिस्तान को हराना है। उन्होंने 5-0 से मुकाबला जीतकर गोल्ड मेडल कारगिल के शहीदों और वीर जवानों को समर्पित किया। इस पर प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे उस जीत का सम्मान और बढ़ गया।
पोडियम पर राष्ट्रगान सुनकर नहीं रुक सके आंसू
एक अन्य महिला खिलाड़ी ने कहा कि पेरिस ओलंपिक में महज एक किलो के अंतर से मेडल छूट गया था। पिछले चार साल चोट, पारिवारिक मुश्किलों और लगातार संघर्ष में बीते। जब कॉमनवेल्थ गेम्स में पोडियम पर खड़ी थीं, तिरंगा ऊपर जा रहा था और राष्ट्रगान बज रहा था, तब आंसू अपने आप निकल आए। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सिर्फ उनका मेडल नहीं, आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है।

खेलो इंडिया की तारीफ, बोले, यहीं से बदल रही भारतीय खेलों की तस्वीर
खिलाड़ियों ने कहा कि लगातार प्रतियोगिताएं मिलने लगी हैं और खेलो इंडिया स्कीम से बड़ी संख्या में नए खिलाड़ी निकल रहे हैं। इससे देश का Sports Ecosystem तेजी से मजबूत हुआ है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सिर्फ खेल सुविधाएं बनाना काफी नहीं होता, मेडल तब आते हैं जब देश में Sports Culture तैयार होता है। उन्होंने खिलाड़ियों से कहा कि उन्हें आगे भी नई पीढ़ी को प्रेरित करना होगा।

वाराणसी स्टेडियम और काशी विश्वनाथ का भी हुआ जिक्र
बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने एक खिलाड़ी से वाराणसी में बने स्टेडियम के बारे में पूछा। खिलाड़ी ने बताया कि वह वहां ट्रेनिंग कर चुकी हैं और भविष्य में काशी में ही बसना चाहती हैं क्योंकि उन्हें काशी विश्वनाथ मंदिर बेहद पसंद है। प्रधानमंत्री ने सावन का जिक्र करते हुए फिर से दर्शन करने की सलाह दी।






