
देहरादून, 12 अगस्त 2026:
रूस में करीब 97 दिनों से फंसे पिथौरागढ़ के दो भाइयों आनंद सिंह कार्की और भूपेंद्र सिंह कार्की की आखिरकार सकुशल घर वापसी हो गई। उत्तराखंड सरकार के लगातार प्रयासों और सीएम पुष्कर सिंह धामी के हस्तक्षेप के बाद दोनों भाई सुरक्षित भारत लौटे। घर पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री धामी ने दोनों युवकों से फोन पर बातचीत कर उनका हालचाल जाना और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली।
परिजनों के अनुसार दोनों भाइयों को सितारगंज की एक ट्रैवल एजेंसी के माध्यम से विदेश में बेहतर रोजगार दिलाने का भरोसा दिया गया था। परिवार का आरोप है कि रोजगार के नाम पर उनसे करीब आठ लाख रुपये लिए गए। इसके बाद दोनों 5 मई को भारत से रवाना हुए और 6 मई को मॉस्को पहुंचे।
परिवार का कहना है कि रूस पहुंचने के बाद युवकों को उस काम में नहीं लगाया गया जिसके लिए उन्हें भेजा गया था। इसके बजाय उनकी इच्छा के विपरीत अन्य कार्य कराए गए और उसका भुगतान भी नहीं किया गया। आरोप है कि दोनों को स्वतंत्र रूप से आने-जाने की अनुमति नहीं थी और काम करने से इनकार करने पर धमकाया जाता था। लंबे समय तक दोनों से नियमित संपर्क नहीं हो पाने से परिजनों की चिंता बढ़ती गई। अंतिम संपर्क के दौरान युवकों ने उस परिसर के आसपास ड्रोन अथवा मिसाइल हमले की जानकारी भी परिवार को दी थी जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर आशंका और गहरा गई।
मामला संज्ञान में आते ही सीएम धामी ने अधिकारियों को दोनों युवकों की सुरक्षित और शीघ्र वापसी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके बाद राज्य सरकार के अधिकारियों ने विदेश मंत्रालय और रूस स्थित भारतीय दूतावास के साथ लगातार समन्वय स्थापित कर उनकी वापसी के प्रयास तेज किए। आखिरकार करीब 97 दिनों के लंबे इंतजार के बाद दोनों भाई सकुशल अपने घर पहुंच गए।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड का कोई भी नागरिक दुनिया के किसी भी हिस्से में संकट में होगा तो राज्य सरकार उसकी सहायता के लिए हरसंभव प्रयास करेगी। प्रदेशवासियों की सुरक्षा, सम्मान और हितों की रक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
दोनों युवकों की वापसी में यूकेडी नेता काशी सिंह ऐरी और समाजसेवी रामदेव वर्मा ने भी परिवार के साथ संपर्क बनाए रखते हुए समन्वय में सहयोग किया। दोनों बेटों के सुरक्षित घर लौटने पर परिजनों ने मुख्यमंत्री धामी, विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावास, राज्य सरकार के अधिकारियों और सहयोग करने वाले सभी लोगों का आभार जताया।






