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UP Bureaucracy से IAS रिंकू सिंह राही का मोहभंग! बोले- मैं इस व्यवस्था के लिए उपयुक्त नहीं, दूसरे कैडर की मांग

भ्रष्टाचार और माफिया संरक्षण पर फिर उठाए सवाल, बोले- जिद्दी अफसरों को स्वतंत्र काम नहीं करने देती व्यवस्था, 2009 में छात्रवृत्ति घोटाला उजागर करने पर खाई थीं सात गोलियां

लखनऊ, 20 अगस्त 2026:

यूपी कैडर के IAS अफसर रिंकू सिंह राही एक बार फिर अपने बेबाक तेवरों को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने उत्तर प्रदेश की नौकरशाही संस्कृति पर सवाल खड़े करते हुए अपना कैडर बदलने की मांग कर दी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखे लंबे पोस्ट में राही ने साफ कहा कि वह उत्तर प्रदेश की मौजूदा नौकरशाही संस्कृति के लिए ‘एकदम उपयुक्त नहीं’ हैं और अब किसी दूसरे राज्य में काम करने का अवसर चाहते हैं।

राही ने लिखा कि आईएएस बनने का उनका उद्देश्य उन कामों को करना था जिनकी अपेक्षा जनता से किए वादों को पूरा करने के लिए देश और प्रदेश का शीर्ष नेतृत्व प्रशासन से करता रहा है। लेकिन उनके मुताबिक उत्तर प्रदेश की नौकरशाही बार-बार यह साबित करती है कि संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप काम करना यहां बेहद मुश्किल है।

‘भ्रष्ट नौकरशाही नहीं चाहती कि जिद्दी अफसर स्वतंत्र काम करें’

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राही ने आरोप लगाया कि भ्रष्ट नौकरशाही कभी नहीं चाहेगी कि उनके जैसे ‘जिद्दी लोगों’ को स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर मिले। उन्होंने यह भी कहा कि व्यवस्था में लंबे समय से रचे-बसे ईमानदार अधिकारियों के सामने भी अहं और मानसिकता की चुनौती रहती है। उनके मुताबिक जब कोई अधिकारी उस काम को संभव कर देता है, जिसे वर्षों से असंभव बताया जाता रहा हो, तो उसका विरोध और ज्यादा कठोर हो जाता है।
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उन्होंने व्यवस्था के ‘सुविधाजनक मध्यम मार्ग’ पर भी तीखा हमला बोला। राही ने लिखा कि कुछ अधिकारी खुद जियो और खुद को लाभ पहुंचाने वालों को जीने दो की नीति पर चलते हैं, जबकि जनता के हिस्से में केवल बीच-बीच में कुछ कल्याणकारी काम आते हैं।

‘समस्या माफिया के होने से नहीं, ऊपर से संरक्षण मिलने से है’

आईएएस अधिकारी ने अपने पोस्ट में सबसे गंभीर आरोप माफिया और भ्रष्टाचार को कथित संरक्षण मिलने को लेकर लगाए। उन्होंने कहा कि समस्या माफिया या भ्रष्टाचारियों के मौजूद होने की नहीं, बल्कि उन्हें ऊपर से मिलने वाले संरक्षण की है। उनका कहना है कि ऐसे संरक्षण के बाद व्यवस्था सुधारने की लड़ाई सकारात्मक संघर्ष न रहकर निरर्थक संघर्ष में बदल जाती है।

राही ने लिखा कि यदि उत्तर प्रदेश में ऐसी एक तहसील भी नहीं मिल पा रही, जहां संवैधानिक व्यवस्था लागू करने पर माफिया या भ्रष्टाचारियों को ऊपर से संरक्षण न मिले, तो भविष्य में जनपद, मंडल या आमजन के हित में प्रभाव डालने वाला विभाग मिलना भी मुश्किल दिखाई देता है।

सात गोलियां खाने वाले अफसर का फिर मुखर विरोध

रिंकू सिंह राही लंबे समय से भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने तेवरों के लिए चर्चित रहे हैं। वर्ष 2009 में छात्रवृत्ति घोटाले का खुलासा करने के बाद उन पर जानलेवा हमला हुआ था और उन्हें सात गोलियां मारी गई थीं। हाल के दिनों में ब्लॉक प्रमुख से विवाद के बाद उनका तबादला भी चर्चा में रहा। अब राही ने कहा है कि किसी दूसरे राज्य या कैडर में जाकर वह यह परखना चाहते हैं कि अनुकूल संस्थागत वातावरण मिलने पर वह कितना सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। उनका यह बयान यूपी की नौकरशाही और प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा सवाल बनकर सामने आया है।

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Rakesh Kumar Verma

राकेश कुमार वर्मा एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें मीडिया जगत में लगभग 31 वर्षों का व्यापक और समृद्ध अनुभव है। इन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य करते हुए अपनी मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वतंत्र भारत, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता एक्सप्रेस,… More »

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