
लखनऊ, 26 अगस्त 2026:
नवाबी शहर लखनऊ की पहचान एक बार फिर उसकी गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी भाईचारे से हुई। बुधवार को बारावफात के मौके पर निकले जुलूस के दौरान शहर के कई इलाकों में हिंदू समाज के लोगों ने स्वागत कर सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश की। यहियागंज में श्री सिद्धनाथ मंदिर के सामने हुआ स्वागत खास आकर्षण का केंद्र रहा जहां व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने जुलूस में शामिल लोगों का गर्मजोशी से अभिनंदन किया।

यहियागंज व्यापार मंडल की ओर से इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के अध्यक्ष एवं ईदगाह के शाही इमाम मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली का माला और अंगवस्त्र पहनाकर स्वागत किया गया। इस दौरान हजरत मौलाना अब्दुल अजीम फारुकी, अब्दुल बारी फारुकी, महमूद मदनी, यासिर फारुकी, अरशद मदनी और रावे हसनी नदवी सहित अन्य लोगों का भी सम्मान किया गया। जुलूस में शामिल लोगों के लिए व्यापार मंडल की ओर से बिस्किट, फ्रूटी और अन्य खाद्य सामग्री का वितरण किया गया।
यहियागंज व्यापार मंडल के अध्यक्ष अमरनाथ मिश्र ने कहा कि लखनऊ की असली पहचान उसकी गंगा-जमुनी तहजीब, प्रेम और भाईचारे में है। उन्होंने कहा कि यहियागंज बाजार में अलग-अलग धर्मों और वर्गों के व्यापारी लंबे समय से मिल-जुलकर व्यापार करते हैं। एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े रहते हैं।
उन्होंने कहा कि होली, दीपावली, ईद और बकरीद जैसे प्रमुख त्योहारों पर व्यापारी एक-दूसरे के पर्व का सम्मान करते हैं। इसी आपसी विश्वास और सौहार्द की वजह से करीब तीन किलोमीटर में फैला यहियागंज बाजार आज भी एकजुट है।
अमरनाथ मिश्र ने कहा कि 12वीं रबीउल अव्वल के जुलूस का स्वागत भी इसी पुरानी परंपरा का हिस्सा है। धर्म अलग हो सकते हैं लेकिन इंसानियत, प्रेम और भाईचारा सभी को जोड़ता है। यही सद्भाव लखनऊ की सबसे बड़ी ताकत और पहचान है। इस मौके पर अमरनाथ मिश्र, के साथ कुश मिश्र, प्रशांत गर्ग, कामरान, आमिर बाबू समेत व्यापार मंडल के कई पदाधिकारी और व्यापारी मौजूद रहे।






