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UP में ईवी क्रांति की रफ्तार तेज : 238 पब्लिक चार्जिंग स्टेशन, 714 चार्जर से बदलेगी ग्रीन मोबिलिटी की तस्वीर

पीएम ई-ड्राइव और यूपी ईवी पॉलिसी-2022 को मिलेगा बड़ा बल, लखनऊ-नोएडा समेत 11 शहरों में चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार, 10 साल के मॉडल पर होगा संचालन

लखनऊ, 22 जुलाई 2026:

यूपी में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को बढ़ावा देने की दिशा में योगी सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। केंद्र सरकार की पीएम ई-ड्राइव स्कीम और उत्तर प्रदेश ईवी मैन्युफैक्चरिंग एवं मोबिलिटी पॉलिसी-2022 के तहत प्रदेश में 238 सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी पहल का उद्देश्य राज्य में मजबूत चार्जिंग नेटवर्क तैयार करना, हरित परिवहन को बढ़ावा देना और इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में बड़े निवेश आकर्षित करना है।

प्रस्ताव के अनुसार पहले चरण में प्रदेशभर में 238 पब्लिक ईवी चार्जिंग स्टेशन विकसित किए जाएंगे जहां कुल 714 चार्जर लगाए जाएंगे। इन स्टेशनों के संचालन के लिए 10 वर्ष का अनुबंध मॉडल प्रस्तावित किया गया है। सरकारी भूमि पर स्थापित होने वाले इन चार्जिंग स्टेशनों का उपयोग केवल ईवी चार्जिंग गतिविधियों के लिए किया जाएगा और संबंधित विभागों से मात्र एक रुपये प्रति किलोवाट की दर से भूमि उपयोग शुल्क लिया जाएगा।

योजना के तहत चार्जिंग स्टेशनों को चार श्रेणियों में विभाजित किया गया है। सरकारी कार्यालयों में बनने वाले स्टेशनों को अपस्ट्रीम इंफ्रास्ट्रक्चर और चार्जिंग उपकरण (ईवीएसई) पर 100 प्रतिशत तक सहायता देने का प्रावधान है। वहीं रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, मेट्रो स्टेशन, पेट्रोल पंप, टोल प्लाजा और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर स्थापित होने वाले चार्जिंग स्टेशनों के लिए भी अलग-अलग स्तर पर सब्सिडी प्रस्तावित है। सरकार का लक्ष्य शहरों के साथ-साथ प्रमुख राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर भी मजबूत चार्जिंग नेटवर्क तैयार करना है।

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प्रस्ताव में उत्तर प्रदेश ईवी मैन्युफैक्चरिंग एवं मोबिलिटी पॉलिसी-2022 का उल्लेख करते हुए राज्य को इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण और नवाचार का वैश्विक केंद्र बनाने की मंशा दोहराई गई है। नीति के तहत चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग नेटवर्क का विस्तार, स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा, अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहन तथा सेवा प्रदाताओं को पूंजीगत सहायता और सरकारी भूमि उपलब्ध कराने जैसे प्रावधान पहले से लागू हैं।

चार्जिंग स्टेशनों की संख्या के लिहाज से गौतमबुद्ध नगर सबसे आगे रहेगा। वहां 39 स्टेशन प्रस्तावित हैं। इसके बाद लखनऊ में 36, मेरठ में 35, गोरखपुर में 32, वाराणसी में 28, आगरा में 21, मथुरा में 14, प्रयागराज में 13, कानपुर नगर में 12, गाजियाबाद में 6 और कानपुर देहात में 2 स्टेशन विकसित किए जाएंगे।

इन स्टेशनों के लिए नगर निगमों, विकास प्राधिकरणों, विद्युत वितरण कंपनियों, यूपीएसआरटीसी, जिला प्रशासन और अन्य सरकारी विभागों की उपलब्ध भूमि का उपयोग किया जाएगा। शहरों के भीतर 40 से 60 वर्गमीटर तथा हाईवे पर 250 से 300 वर्गमीटर तक भूमि पर बड़े चार्जिंग हब विकसित किए जाएंगे, जहां बसों और ट्रकों के लिए हाई कैपेसिटी डीसी फास्ट चार्जर भी लगाए जाएंगे।

मुख्य सचिव के स्तर पर विभिन्न विभागों से सरकारी भूमि का ब्योरा जुटाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। माना जा रहा है कि यह परियोजना उत्तर प्रदेश में ग्रीन मोबिलिटी को नई रफ्तार देने के साथ-साथ इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने की राह भी आसान बनाएगी।

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Rakesh Kumar Verma

राकेश कुमार वर्मा एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें मीडिया जगत में लगभग 31 वर्षों का व्यापक और समृद्ध अनुभव है। इन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य करते हुए अपनी मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वतंत्र भारत, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता एक्सप्रेस,… More »

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