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Nepal में जलप्रलय : 180 KM की रफ्तार से आया सैलाब, अब तक 469 मौतें, 1400 लापता, अब यूपी-बिहार पर भी बाढ़ का खतरा

tibet border से आई तबाही ने नेपाल को हिला दिया, भोटेकोशी-त्रिशूली में जलप्रलय से पुल-सड़कें बहीं, लापता लोगों में 517 विदेशी, भारतीयों की भी बड़ी संख्या—नई बैरियर झील ने बढ़ाई दहशत

न्यूज डेस्क, 28 अगस्त 2026:

पड़ोसी देश नेपाल इस समय कुदरत के ऐसे कहर से जूझ रहा है जिसकी तस्वीरें और आंकड़े दिल दहला रहे हैं। तिब्बत सीमा से सटी भोटेकोशी नदी में अचानक आई भीषण बाढ़ ने रास्ते में आने वाली हर चीज को अपने साथ बहा दिया। इस जलप्रलय में मृतकों की संख्या बढ़कर 469 हो गई है, जबकि सैकड़ों की संख्या में लोग अब भी लापता हैं। लापता लोगों में विदेशी नागरिकों के साथ भारतीय नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं।

नेपाल पुलिस के मुताबिक बाढ़ और भूस्खलन में 1,545 लोग घायल होकर बचाए गए हैं। चितवन में सबसे ज्यादा 178 मौतें दर्ज हुई हैं। इसके बाद एनपी ईस्ट में 110, गोरखा में 44, नुवाकोट में 37, धाडिंग में 33, तनहुन में 28, एनपी वेस्ट में 27 और रसुवा में 12 लोगों की मौत हुई है। रसुवा से 644, नुवाकोट से 898 और धाडिंग से तीन लोगों को बचाया गया है।

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30 देशों के 1400 से ज्यादा लोग लापता

आपदा की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 30 देशों के 1,400 से अधिक लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। नेपाल के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार 910 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं, जिनमें 517 विदेशी नागरिक हैं। 50 विदेशी नागरिकों को अब तक हवाई मार्ग से सुरक्षित निकाला जा चुका है।
लापता लोगों में 113 नेपाली पर्यटक, सेना और पुलिस के 85 सुरक्षाकर्मी तथा रसुवा जिले के 161 स्थानीय लोग भी शामिल हैं। अलग-अलग एजेंसियों के आंकड़ों में अंतर को अधिकारियों ने रिपोर्टिंग और राहत-बचाव एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी से जोड़ा है। तबाही के बाद अस्पतालों के बाहर अपने लापता परिजनों की तलाश में लोगों की भीड़ उमड़ रही है।

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180 KM प्रति घंटे की रफ्तार से आया सैलाब

चीनी भूविज्ञानी गुओ झाओचेंग के अनुसार बर्फ खिसकने से भोटेकोशी में आया सैलाब करीब 50 मीटर प्रति सेकंड यानी 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आगे बढ़ा। इतनी तेज रफ्तार के कारण लोगों को संभलने या सुरक्षित स्थान तक पहुंचने का मौका तक नहीं मिला। कीचड़ और मलबे का फैलाव करीब 20 किलोमीटर तक बताया गया है।

80 पुल और करीब 42 KM सड़कें तबाह

बाढ़ ने नेपाल के परिवहन ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। भोटेकोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्रों में करीब 60 घर बह गए। 35 मोटर योग्य पुल, 45 सस्पेंशन ब्रिज और करीब 40 किलोमीटर सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। कई वाहन मलबे में दब गए या बाढ़ में बह गए।

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खतरा अभी टला नहीं, नई बैरियर झील से फिर सैलाब का डर

सबसे बड़ी चिंता अब यह है कि तबाही का अगला दौर आ सकता है। नेपाल के हाइड्रोलॉजी और मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक चीन के तिब्बत क्षेत्र में छोचेन खोला और पुरेपु त्सांगपो नदियों के संगम के पास नई बैरियर झील बन गई है। गुरुवार सुबह तक इसमें करीब 20 लाख घनमीटर पानी जमा हो चुका था और अगले तीन दिनों में इसके 50 लाख घनमीटर तक पहुंचने की आशंका है।

एक सितंबर के आसपास पानी का दबाव चरम पर पहुंचने की आशंका है, जिससे भोटेकोशी में दोबारा बाढ़ आ सकती है। नेपाल ने लोगों को भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों से दूर रहने की अपील की है। खोज एवं बचाव दलों को भी अलर्ट किया गया है। हालात को देखते हुए उत्तर प्रदेश और बिहार में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है।

भारत समेत अमेरिका और WHO मदद को आगे आए

नेपाल की मदद के लिए भारत ने दो सैन्य विमानों से अब तक 47.5 टन आपात राहत सामग्री भेजी है। इनमें 37.5 टन सामग्री सी-17 विमान से हिंडन एयरबेस से भेजी गई, जबकि इससे पहले 10 टन राहत सामग्री पहुंचाई गई थी। उधर, अमेरिका ने नेपाल के लिए 5 लाख डॉलर की सहायता घोषित की है जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दवाओं और बहुउद्देशीय टेंट समेत जरूरी चिकित्सा सामग्री भेजी है।

जलप्रलय के बीच फिर कांपी धरती

मुसीबतों के बीच नेपाल में भूकंप ने भी दस्तक दी। गुरुवार रात 9:18 बजे 3.2 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। भूकंप का केंद्र जमीन के करीब 10 किलोमीटर नीचे था। नेपाल में बाढ़, भूस्खलन और अब नई बैरियर झील से संभावित खतरे ने चिंता और बढ़ा दी है।

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