Lucknow City

मोमबत्ती से शुरू हुई कहानी, गुलकंद-शर्बत तक पहुंचा कारोबार, सोनभद्र की निर्मला बनीं गांव की मिसाल

60 हजार की मदद से खड़ा किया ढाई लाख का कारोबार स्वयं सहायता समूह से जुड़कर सीखा हुनर, आज गांव की 15 महिलाएं भी रोजगार की राह पर

लखनऊ, 29 अगस्त 2026:

कभी परिवार का खर्च चलाने के लिए मजदूरी करने वाली सोनभद्र की निर्मला आज अपने हुनर और हौसले के दम पर सफल उद्यमी बन चुकी हैं। राबर्ट्सगंज ब्लॉक के बिचपई गांव की रहने वाली अनुसूचित जाति की निर्मला ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर न सिर्फ अपने लिए रोजगार का रास्ता बनाया अपितु गांव की दूसरी महिलाओं को भी आत्मनिर्भरता की राह दिखाई है। योगी सरकार से मिली आर्थिक और तकनीकी मदद ने उनके इस सफर को नई रफ्तार दी। आज उनके कारोबार से सालाना करीब ढाई लाख रुपये की आमदनी हो रही है।

घूंघट और मजदूरी से निकलकर कारोबार की दुनिया में कदम

निर्मला बीए तक पढ़ी हैं। पति, तीन बेटियों और एक बेटे समेत छह सदस्यीय परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर नहीं थी। घर की जिम्मेदारियों के साथ उन्हें मजदूरी भी करनी पड़ती थी। बच्चों की पढ़ाई और परिवार की आमदनी बढ़ाने की चाहत ने उन्हें स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। यहीं से उनकी जिंदगी में बदलाव की शुरुआत हुई। समूह के जरिए उन्होंने मोमबत्ती बनाने का प्रशिक्षण लिया। इसके बाद तय किया कि सीखे हुए हुनर को सिर्फ शौक तक सीमित नहीं रखेंगी, बल्कि इसे कारोबार में बदलेंगी।

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60 हजार की सीड मनी ने बदली दिशा

निर्मला के प्रयासों को देखते हुए उद्यमिता विकास परियोजना की टीम ने उन्हें 60 हजार रुपये की सीड मनी उपलब्ध कराई। इस रकम से उन्होंने अलग-अलग डिजाइन और आकार की मोमबत्तियों के सांचे खरीदे। दीपावली और अन्य त्योहारों पर रंग-बिरंगी मोमबत्तियों की बिक्री शुरू की। मांग बढ़ी तो यह काम धीरे-धीरे नियमित कारोबार में बदल गया।

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इसके बाद खादी ग्रामोद्योग विभाग के सहयोग से उन्हें पॉपकॉर्न मशीन मिली। आमदनी का एक और जरिया जुड़ गया। खाद्य सुरक्षा एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग से दो माह का प्रशिक्षण लेकर उन्होंने गुलाब से गुलकंद और शर्बत, जबकि गाजर से मुरब्बा बनाना भी सीखा। अब मौसम और मांग के हिसाब से इन उत्पादों का निर्माण करती हैं। फूल, पेड़ और अलग-अलग सजावटी आकृतियों वाली उनकी डिजाइनर मोमबत्तियां बाजार में पहचान बना रही हैं। अब निर्मला अपने उत्पादों को ऑनलाइन बाजार तक पहुंचाने की तैयारी में हैं।

निर्मला की उड़ान से गांव की महिलाओं को मिला हौसला

निर्मला की कामयाबी का असर अब पूरे गांव में दिखाई देने लगा है। उनके कारोबार से प्रेरित होकर करीब 15 महिलाएं रोजगार और अपना उद्यम शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ी हैं। बिचपई जैसे पिछड़े और आदिवासी बहुल क्षेत्र में यह बदलाव खास मायने रखता है। निर्मला के मुताबिक पहले गांव की महिलाएं घर और घूंघट तक सीमित रहती थीं।

अब वे घर से बाहर निकलकर काम और कारोबार की बात कर रही हैं। बढ़ती आमदनी से बच्चों को बेहतर स्कूलों में पढ़ाने की उम्मीद भी मजबूत हुई है। कभी लोगों से बात करने में झिझकने वाली निर्मला आज आत्मविश्वास के साथ अपने कारोबार की योजना बताती हैं। उनके पति भी इस उद्यम को आगे बढ़ाने में सहयोग कर रहे हैं।

आजीविका मिशन से गांव-गांव बदल रही तस्वीर

उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के जरिए स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता और उद्यम के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

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Rakesh Kumar Verma

राकेश कुमार वर्मा एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें मीडिया जगत में लगभग 31 वर्षों का व्यापक और समृद्ध अनुभव है। इन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य करते हुए अपनी मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वतंत्र भारत, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता एक्सप्रेस,… More »

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