
लखनऊ, 1 सितंबर 2026:
यूपी में 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती का मामला एक बार फिर सड़क पर आ गया है। नियुक्ति की मांग को लेकर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का आंदोलन मंगलवार को उस समय और तेज हो गया जब बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों ने बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के आवास का घेराव कर दिया। करीब एक घंटे तक नारेबाजी और हंगामा चलता रहा। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। प्रदर्शन में दिव्यांग अभ्यर्थी भी शामिल थे।
प्रदर्शनकारी लगातार ‘ऐसी क्या मजबूरी है-आरक्षण की चोरी है’ और ‘पिछड़ा आयोग ने माना है-आरक्षण घोटाला है’ जैसे नारे लगाते रहे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को मौके से हटाने का प्रयास किया। कई अभ्यर्थियों को पुलिसकर्मी टांगकर वहां से ले गए और उन्हें इको गार्डेन भेज दिया गया।
क्या है अभ्यर्थियों का आरोप?
अभ्यर्थियों के मुताबिक वर्ष 2018 में 68,500 सहायक शिक्षकों की भर्ती निकाली गई थी। इसमें दिव्यांग, भूतपूर्व सैनिक, अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों को पांच प्रतिशत की छूट का प्रावधान था। आरोप है कि इन श्रेणियों के अभ्यर्थियों को इस छूट का लाभ नहीं दिया गया और सामान्य अभ्यर्थियों के साथ ही परिणाम जारी कर दिया गया।
अभ्यर्थियों की मांग है कि भर्ती परीक्षा के पासिंग मार्क्स में पांच प्रतिशत की छूट देते हुए 150 पूर्णांक वाली परीक्षा में 60 अंक यानी 40 प्रतिशत पर परिणाम संशोधित किया जाए और नई चयन सूची जारी की जाए।

धरने का नेतृत्व कर रहे तूफान सिंह ने कहा कि अभ्यर्थी किसी से अहसान नहीं मांग रहे बल्कि अपने संवैधानिक अधिकार और न्याय की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के आदेश के बाद उन्हें न्याय की उम्मीद जगी है। शासन को आयोग के आदेश को लंबित रखने के बजाय तत्काल अनुपालन की दिशा में कदम उठाना चाहिए।
‘8 साल से सिर्फ चप्पल घिस रहे’
सीतापुर के अभ्यर्थी आशुतोष वर्मा ने कहा कि वह पिछले आठ वर्षों से नौकरी की उम्मीद में भटक रहे हैं। उनके मुताबिक भर्ती में आरक्षण को लेकर गड़बड़ी हुई और राज्य व राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने भी नियमों के पालन की बात कही है। उनका कहना है कि अब आयोग के आदेश का प्रभावी अनुपालन ही उनकी सबसे बड़ी मांग है।
अभ्यर्थियों ने अपनी आर्थिक परेशानियां भी सामने रखीं। उनका कहना है कि वे साधारण परिवारों से आते हैं। पिता ने फसल बेचकर पढ़ाया लेकिन अब लखनऊ आने के लिए भी कर्ज लेना पड़ रहा है। कई अभ्यर्थियों का दावा है कि उन्हें रेलवे और बस स्टेशनों पर रात गुजारने और कई बार भूखे रहने तक की नौबत आती है।

अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती को आठ वर्ष बीत चुके हैं। अब उनके सामने ओवरएज होने का संकट खड़ा है। कई प्रदर्शनकारियों ने कहा कि नौकरी के महज 10 से 12 साल ही बचे हैं लेकिन नियुक्ति पत्र अभी तक नहीं मिला। अभ्यर्थियों ने कहा कि वे कई बार शिक्षा मंत्री के आवास और अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगा चुके हैं लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
उन्होंने साफ किया कि जब तक न्याय नहीं मिलता और राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के आदेश का प्रभावी अनुपालन नहीं होता, तब तक उनका लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण संघर्ष जारी रहेगा। प्रदर्शन में नवीन चौधरी, अखिल यादव, योगेश लोधी, ललिता चौधरी, कुसुम चौधरी, अनुराग पाल, विनोद प्रजापति, राम भवन साहू, शेरा, उमेश गुप्ता, रणबहादुर वर्मा, नसीम, राकेश साहनी सहित तमाम अभ्यर्थ शामिल थे।






