
लखनऊ, 2 सितंबर 2026:
यूपी की 69 हजार शिक्षक भर्ती में नियुक्ति की मांग को लेकर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का आंदोलन राजधानी लखनऊ में बुधवार को भी जारी रहा। लंबे समय से नियुक्ति की मांग कर रहे सैकड़ों अभ्यर्थी विधानसभा घेराव के लिए निकले लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक लिया। इसके बाद अभ्यर्थियों ने सड़क किनारे बैठकर नारेबाजी की। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा।

अभ्यर्थी चारबाग स्थित केकेसी के पास दीनदयाल उपाध्याय पार्क से विधानसभा घेराव के लिए निकले थे। पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। प्रदर्शनकारियों ने मौके पर ही बैठकर सरकार के खिलाफ नारे लगाए और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कराने की मांग की। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों को बसों में बैठाकर इको गार्डन स्थित धरना स्थल भेज दिया।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमरेंद्र पटेल ने कहा कि 69 हजार शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया वर्ष 2018 में शुरू हुई थी। उनका आरोप है कि भर्ती का परिणाम जारी होने के बाद आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के साथ व्यापक स्तर पर अन्याय हुआ और बड़ी संख्या में पात्र अभ्यर्थी नौकरी से वंचित रह गए।
अभ्यर्थियों के मुताबिक लंबे आंदोलन और न्यायिक प्रक्रिया के बाद 13 अगस्त 2024 को लखनऊ हाईकोर्ट की डबल बेंच ने फैसला सुनाते हुए नियमों के अनुसार नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ाने का आदेश दिया था। हालांकि, कुछ सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी। इसके बाद से मामला शीर्ष अदालत में लंबित है। इस प्रकरण पर 8 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई प्रस्तावित है।

प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार ने 69 हजार शिक्षक भर्ती में सामने आई विसंगतियों को दूर करने के लिए 6800 अभ्यर्थियों की एक सूची जारी की थी लेकिन सूची में शामिल उम्मीदवारों को अब तक नियुक्ति नहीं मिल सकी है। उनका कहना है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में 6800 की सूची में शामिल अभ्यर्थियों के पक्ष का मजबूती से बचाव करे और उनकी नियुक्ति सुनिश्चित कराए।
अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग केवल नियुक्ति तक सीमित नहीं है,श बल्कि वे मुख्यमंत्री से सीधे मुलाकात कर अपनी बात रखना चाहते हैं। प्रदर्शन में अवनीश यादव, यशवंत यादव, विक्रम यादव, अमित मौर्य, भोला अंबेडकर समेत बड़ी संख्या में अभ्यर्थी शामिल रहे।






