
प्रमोद कुमार
मलिहाबाद (लखनऊ), 2 सितंबर 2026:
यूपी की सियासत में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले एक सोशल मीडिया पोस्ट ने नई हलचल पैदा कर दी है। भाजपा के वरिष्ठ दलित नेता एवं पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री कौशल किशोर के लगातार दो पोस्ट ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं और अटकलों को हवा दे दी है। खास बात यह है कि दोनों पोस्ट में उन्होंने किसी नेता, पार्टी या व्यक्ति का नाम नहीं लिया लेकिन उनके शब्दों के सियासी मायने तलाशे जा रहे हैं।
कौशल किशोर ने सोमवार को सोशल मीडिया पर लिखा, ‘आज मेरे एक मित्र से बात हो रही थी तो उन्होंने कहा कि गेंद जितनी ऊपर जानी थी चली गई, अब नीचे आ रही है। नीचे आने की स्पीड भी बढ़ती जाती है। गेंद के गिरने की स्पीड को कोई कम नहीं कर सकता है।’
इसके अगले दिन मंगलवार को उन्होंने एक और पोस्ट किया। इसमें लिखा कि कोई भी संगठन या आंदोलन जब अपने उसूलों से भटक जाता है तो वह वहीं पहुंच जाता है, जहां से शुरू हुआ था। इससे विचारधारा से जुड़े लोगों का विश्वास भी टूटता है। उन्होंने कहा कि इसलिए उसूलों से भटकना नहीं चाहिए।
पोस्ट के पीछे क्या है सियासी संदेश?
कौशल किशोर के इन बयानों के बाद राजनीतिक विश्लेषक अपने-अपने तरीके से इनके मायने निकाल रहे हैं। विपक्ष इसे भाजपा की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर परोक्ष टिप्पणी बता रहा है। वहीं, भाजपा के भीतर कुछ लोग इसे कौशल किशोर की व्यक्तिगत निराशा से जोड़कर देख रहे हैं।

उनके इन बयानों को पिछले दिनों उनकी पत्नी और मलिहाबाद से भाजपा विधायक जयदेवी कौशल से जुड़े उस विवाद से भी जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें काकोरी के एक मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान के दौरान कथित जातीय भेदभाव के आरोप लगाए गए थे।
कांग्रेस ने कहा- इशारा साफ है
कांग्रेस नेता अजय कुमार लल्लू ने कौशल किशोर के पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया लेकिन इशारा साफ है। उन्होंने इसे विकास, विश्वगुरु और अमृत काल जैसे नारों के बाद ‘गेंद के नीचे आने’ से जोड़ते हुए भाजपा पर निशाना साधा।
हालांकि भाजपा की ओर से अब तक कौशल किशोर के पोस्ट पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। खुद कौशल किशोर ने भी यह स्पष्ट नहीं किया कि उनका इशारा किसकी ओर है। उन्होंने इतना जरूर कहा है कि वह भाजपा के ‘मजबूत सिपाही’ हैं और पार्टी तब तक नहीं छोड़ेंगे, जब तक उन्हें धक्के मारकर बाहर न निकाला जाए।
दो बार सांसद, मोदी सरकार में रहे मंत्री
कौशल किशोर मोहनलालगंज से दो बार सांसद रह चुके हैं। 2021 से 2024 तक नरेंद्र मोदी सरकार में आवास एवं शहरी मामलों के राज्य मंत्री रहे। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें मोहनलालगंज सीट से हार का सामना करना पड़ा। इससे पहले वे मलिहाबाद से विधायक और मुलायम सिंह यादव सरकार में राज्यमंत्री रह चुके हैं। लंबे समय तक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से भी जुड़े रहे।
अब उनके इन पोस्टों ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यूपी की सियासत में एक नया सवाल जरूर खड़ा कर दिया है-आखिर ‘गेंद’ किसकी ओर इशारा है और कौशल किशोर किस ‘उसूल’ से भटकने की बात कर रहे हैं?






