Uttar Pradesh

डिजिटल गांवों की ओर बढ़ा UP : 5 साल में 57 हजार पंचायतों में विकास, सुशासन व स्वच्छता का नया मॉडल

ग्राम सचिवालयों से लेकर डिजिटल सेवाओं तक बड़ा विस्तार, पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में तेजी से बढ़े कदम, अब ‘मेरा तालाब-मेरी जिम्मेदारी’ और पंचायत उत्सव भवन जैसी नई योजनाओं पर फोकस

लखनऊ, 13 जून 2026:

यूपी का पंचायती राज विभाग पांच वर्षों में ग्रामीण विकास, डिजिटल सुशासन, स्वच्छता और आधारभूत ढांचे के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर प्रदेश की ग्राम पंचायतों को आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में विभाग की उपलब्धियों और भावी योजनाओं पर प्रस्तुत रिपोर्ट में ग्रामीण क्षेत्रों में हुए व्यापक बदलावों का विस्तृत खाका सामने रखा गया।

प्रदेश में वर्तमान में 57,694 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें लगभग 15.53 करोड़ ग्रामीण आबादी निवास करती है। यह राज्य की कुल जनसंख्या का करीब 78 प्रतिशत हिस्सा है। ग्रामीण प्रशासन को मजबूत बनाने के लिए सभी ग्राम पंचायतों में ग्राम सचिवालय स्थापित किए गए हैं। 24,311 पंचायत भवनों का निर्माण कराया गया है। इन सचिवालयों को फर्नीचर, कंप्यूटर, इंटरनेट कनेक्टिविटी और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं से लैस किया गया है। इससे ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर ही विभिन्न सरकारी सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं।

डिजिटल सुशासन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में 54,958 कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) संचालित किए जा रहे हैं। इनके माध्यम से अब तक 49.38 लाख से अधिक सेवाएं ग्रामीणों को प्रदान की जा चुकी हैं। इससे न केवल सरकारी सेवाओं की पहुंच बढ़ी है, बल्कि पंचायतों की आय और कार्यप्रणाली में पारदर्शिता भी सुनिश्चित हुई है।

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत उत्तर प्रदेश ने सामुदायिक शौचालय निर्माण में देशभर में अग्रणी स्थान हासिल किया है। इसके अलावा हजारों गांवों में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, ग्रे-वाटर मैनेजमेंट और प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन की योजनाएं प्रभावी ढंग से संचालित की जा रही हैं। ‘वेस्ट टू वेल्थ’ मॉडल के जरिए कचरे को संसाधन में बदलकर पंचायतों की आय बढ़ाने का भी सफल प्रयास किया गया है।

विभाग ने पंचायत प्रतिनिधियों और कर्मचारियों की क्षमता वृद्धि पर भी विशेष ध्यान दिया है। विभिन्न योजनाओं के तहत लाखों जनप्रतिनिधियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया है। वहीं डिजिटल लाइब्रेरी, पंचायत गेटवे पोर्टल और परिवार रजिस्टर के डिजिटलीकरण जैसे नवाचारों ने ग्रामीण प्रशासन को आधुनिक और अधिक प्रभावी बनाया है।

आने वाले वर्षों के लिए पंचायती राज विभाग ने ‘मेरा तालाब-मेरी जिम्मेदारी’, फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट, डिजिटल लाइब्रेरी विस्तार, पंचायत उत्सव भवन और मुख्यमंत्री पंचायत प्रोत्साहन पुरस्कार जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं का रोडमैप तैयार किया है। विभाग का लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में विकास, स्वच्छता, तकनीकी सशक्तिकरण और जनभागीदारी के माध्यम से समृद्ध एवं आत्मनिर्भर गांवों का निर्माण करना है।

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