लखनऊ, 15 मई 2026:
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में यूपी को नई पहचान देने के उद्देश्य से राजधानी लखनऊ में शुक्रवार को एआई ट्रांसफॉर्मेशन कॉन्क्लेव 2026 का आयोजन किया गया। कॉन्क्लेव ने इस दिशा में राज्य की बढ़ती भूमिका को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से सामने रखा। आयोजन में देशभर से 50 से अधिक आईएएस अधिकारियों और वरिष्ठ प्रशासकों ने हिस्सा लिया।
इस दौरान द एआई-पावर्ड पब्लिक एडमिनिस्ट्रेटर: कॉम्पिटेंसीज फॉर ए न्यू एरा ऑफ गवर्नेंस विषय पर उच्चस्तरीय क्षमता निर्माण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का संचालन एनआईएचआईटी (NIHIT) की संस्थापक और इंडिया-यूएस सीईओ फोरम के वर्किंग ग्रुप-7 की शेरपा डॉ. सुबी चतुर्वेदी ने किया।
डॉ. सुबी चतुर्वेदी ने कहा कि उत्तर प्रदेश, खासकर लखनऊ, देश में एआई इनोवेशन का सबसे मजबूत केंद्र बनकर उभर रहा है। तहजीब के शहर के रूप में पहचाना जाने वाला लखनऊ अब नवाचार और तकनीकी विकास की नई पहचान गढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इनमोबी जैसी कंपनियों के डीपटेक ऑपरेशंस शुरू होने से प्रदेश में रिसर्च, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, टैलेंट और उद्यमिता का मजबूत इकोसिस्टम तैयार हो रहा है।
कॉन्क्लेव में राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी एआई नीति पर विस्तार से चर्चा हुई। हाल ही में लखनऊ की वृंदावन योजना में 368 करोड़ रुपये की लागत से देश की पहली एआई सिटी को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा यूपी एआई मिशन के लिए 225 करोड़ रुपये का विशेष बजट तय किया गया है।
स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकारी कामकाज में एआई के इस्तेमाल का राष्ट्रीय मॉडल बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उनका कहना था कि यह पहल राज्य को ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगी।
आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने कहा कि सरकार एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग और डीपटेक जैसी नई तकनीकों के लिए मजबूत आधारभूत ढांचा तैयार कर रही है। हालिया बजट में एआई सिटी, यूपी एआई मिशन और उभरती तकनीकों के विकास के लिए खास प्रावधान किए गए हैं।
कॉन्क्लेव में एआई इकोसिस्टम, साइबर सुरक्षा, डिजिटल गवर्नेंस, एमएसएमई, स्टार्टअप्स और नागरिक सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका पर विस्तार से मंथन हुआ। डॉ. चतुर्वेदी ने प्रधानमंत्री के MANAV फ्रेमवर्क का जिक्र करते हुए नैतिक, जवाबदेह, सुलभ और मानव केंद्रित एआई की जरूरत पर जोर दिया।






