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आजादी के महानायक की पैतृक भूमि चमकेगी : आजाद के गांव बदरका में 5 करोड़ से बन रहा भव्य विरासत केंद्र

स्वतंत्रता संग्राम सर्किट से जुड़ेगा उन्नाव, नवंबर तक बनकर तैयार होगा बहुद्देशीय परिसर, 450 क्षमता का हॉल, लाइब्रेरी और आधुनिक सुविधाओं के साथ युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगा अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद का गांव

लखनऊ/उन्नाव, 7 सितंबर 2026:

​भारत मां के महान सपूत और आजादी के आंदोलन में अंग्रेजों के छक्के छुड़ाने वाले अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की यादों को सहेजने के लिए यूपी सरकार एक ऐतिहासिक पहल की है। राज्य के ‘स्वतंत्रता संग्राम सर्किट’ को नया विस्तार देते हुए आजाद की पैतृक भूमि उन्नाव के बदरका गांव को एक भव्य और आधुनिक पर्यटन-विरासत केंद्र के रूप में नया जीवन दिया जा रहा है। प्रदेश के संस्कृति विभाग की देखरेख में लगभग ₹5 करोड़ की लागत से बन रहे बहुद्देशीय परिसर का 75 प्रतिशत से अधिक निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। सरकार का लक्ष्य है कि इसी वर्ष नवंबर तक इस परियोजना को पूरी तरह तैयार कर जनता को समर्पित कर दिया जाए।

​450 की क्षमता वाला ऑडिटोरियम और आधुनिक सुविधाएं

​बदरका में आकार ले रहा यह बहुद्देशीय परिसर एक ऐतिहासिक स्मारक होने के साथ क्षेत्र की सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों की रीढ़ भी बनेगा। मुख्य भवन के भीतर 450 लोगों की बैठने की क्षमता वाला एक विशाल बहुद्देशीय हॉल (ऑडिटोरियम) तैयार किया जा रहा है।
​इसके अलावा परिसर में कई सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। उनमें महिला एवं पुरुष कलाकारों के लिए अलग-अलग ग्रीन रूम, शौचालय ब्लॉक, स्टाफ रूम, प्रशासनिक कार्यालय, रिकॉर्ड रूम, पेंट्री, बरामदा, पैसेज और विशाल स्टोर रूम।

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​वीरों की गाथाओं और साहित्य को सहेजने के लिए अत्याधुनिक लाइब्रेरी

देश के वीरों की गाथाओं और साहित्य को सहेजने के लिए एक अत्याधुनिक लाइब्रेरी बन रही है। निर्बाध आवागमन के लिए सीसी रोड और इंटरलॉकिंग, जल संरक्षण हेतु रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, जलापूर्ति के लिए 3 HP बोरिंग और एक सुरक्षित गेट व गार्ड रूम।

​युद्धस्तर पर जारी है निर्माण कार्य

​परियोजना का काम अंतिम चरणों में है। भवन की लगभग 50 प्रतिशत स्लैब (छत) ढल चुकी है। मुख्य हॉल के स्लैब का निर्माण तेजी से जारी है। भूतल और प्रथम तल पर ईंट की चिनाई के साथ-साथ प्लास्टर का काम भी समानांतर रूप से चल रहा है। बाहरी सीसी रोड और गार्ड रूम का ढांचा भी तेजी से आकार ले रहा है।

​भाबरा से प्रयागराज तक : एक महानायक का अमर सफर

​चंद्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को मध्य प्रदेश के भाबरा गांव में हुआ था लेकिन उनकी जड़ें उन्नाव की मिट्टी से गहराई से जुड़ी थीं। उनके पिता पं. सीताराम तिवारी मूल रूप से बदरका गांव के ही निवासी थे। वे बाद में आजीविका के सिलसिले में भाबरा चले गए थे।

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​बचपन से ही निशानेबाजी और धनुर्विद्या में निपुण चंद्रशेखर के जीवन को 1919 के जलियांवाला बाग हत्याकांड ने पूरी तरह बदलकर रख दिया। इस क्रूर घटना के बाद उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत को भारत से उखाड़ फेंकने का संकल्प लिया। 27 फरवरी 1931 को प्रयागराज (तत्कालीन इलाहाबाद) के अल्फ्रेड पार्क में अंग्रेजों से लोहा लेते हुए महज 24 वर्ष की अल्पायु में वे देश के लिए बलिदान हो गए। बाद में इस ऐतिहासिक स्थान का नाम ‘चंद्रशेखर आजाद पार्क’ रखा गया।

​युवाओं के लिए प्रेरणा का सेतु बनेगा बदरका

​उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि सरकार का ध्येय बदरका को महज एक ईंट-पत्थर का स्मारक बनाना नहीं अपितु इसे अमर शहीद की राष्ट्रभक्ति और संघर्षगाथा को जीवित रखने वाले केंद्र में बदलना है। इस बहुद्देशीय परिसर के शुरू होने से एक तरफ जहां बदरका में बड़े सामाजिक व सांस्कृतिक आयोजनों को नया मंच मिलेगा, वहीं दूसरी ओर यह स्थल इतिहास, संस्कृति और नई पीढ़ी के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करेगा।

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Rakesh Kumar Verma

राकेश कुमार वर्मा एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें मीडिया जगत में लगभग 31 वर्षों का व्यापक और समृद्ध अनुभव है। इन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य करते हुए अपनी मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वतंत्र भारत, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता एक्सप्रेस,… More »

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