
लखनऊ, 30 सितंबर 2026:
यूपी विधानसभा चुनाव (UP Assembly Election) 2027 की सियासी तपिश बढ़ने के साथ नेताओं के बीच जुबानी जंग भी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राज्यसभा प्रत्याशियों को लेकर योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री एवं सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। राजभर ने सवाल उठाया है कि राज्यसभा भेजे जाने वाले तीनों चेहरे अखिलेश यादव के घोषित ‘PDA’ फार्मूले पर खरे उतरते हैं या नहीं।
मंत्री राजभर ने बुधवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, ‘अखिलेश जी, सुना है आप राज्यसभा के लिए तीन प्रत्याशी मैदान में उतारने जा रहे हैं। ये बताइए, तीनों आपके ‘PDA’ वाले होंगे या नहीं?’ इसके बाद उन्होंने अपने अंदाज में PDA की व्याख्या करते हुए अखिलेश पर निशाना साधा।
सुभासपा प्रमुख ने लिखा कि पहला प्रत्याशी ‘प्रोफेसर साहब’ हैं। उन्हें अखिलेश के ‘PDA वाले परिवार’ से जोड़ते हुए सवाल किया कि अब ‘D’ और ‘A’ से कौन होगा। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि D से कोई ‘दौलतमंद’ और A से कोई ‘अपराधी’ तो नहीं होगा। राजभर ने दावा किया कि पिछड़े, दलित और मुस्लिम समुदाय के लोग जानना चाहते हैं कि अखिलेश के PDA में परिवार, दौलतमंद और अपराधियों को संसद के ऊपरी सदन भेजने की कवायद कैसे हो रही है।
राजभर ने अपने पोस्ट के अंत में अखिलेश को राजनीतिक सलाह भी दी- ‘तीन के चक्कर में दूसरा मत गंवा दीजिएगा।’ दरअसल, राज्यसभा चुनाव को लेकर सपा की रणनीति पहले से ही चर्चा में है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक पार्टी तीन सीटों पर प्रत्याशी उतारने की तैयारी कर रही थी और तीसरे चेहरे के जरिए PDA सामाजिक समीकरण का संदेश देने की चर्चा थी।
अखिलेश जी,
सुना है आप राज्यसभा के लिए तीन प्रत्याशी मैदान में उतारने जा रहे हैं। ये बताइए, तीनों आपके “पीडीए” वाले होंगे या नहीं?
पहला तो प्रोफेसर साहब हैं। ये आपके पीडीए वाले “परिवार” से हो गए। अब “डी” और “ए” से कौन होगा? डी से कोई “दौलतमंद” होगा क्या? ए से कोई “अपराधी”?…
— Om Prakash Rajbhar (@oprajbhar) September 30, 2026
यह हमला ऐसे समय हुआ है जब अखिलेश यादव 24 सितंबर को रायबरेली से PDA रथयात्रा शुरू कर 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों को धार दे चुके हैं। सपा का PDA अभियान पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक सामाजिक समूहों को केंद्र में रखता है।
ऐसे में राज्यसभा प्रत्याशियों को लेकर राजभर का यह हमला सीधे अखिलेश यादव की PDA राजनीति और उसके दावों को निशाने पर लेने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।






