Ayodhya News: राजनाथ सिंह का संतों के बीच आध्यात्मिक प्रवास, 300 साल पुराने उदासीन ऋषि आश्रम में गुरु पर्व में हुए शामिल
रामलला-हनुमानगढ़ी में दर्शन के बाद रानोपाली पहुंचे रक्षा मंत्री, नारायण संस्कृत महाविद्यालय के नए भवन का किया लोकार्पण, गुरु परंपरा और संस्कृत शिक्षा के महत्व पर रखे विचार

अनिल निषाद
अयोध्या, 5 अक्टूबर 2026:
रामनगरी अयोध्या पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को रामलला और हनुमानगढ़ी में दर्शन-पूजन के बाद करीब 300 वर्ष पुराने रानोपाली स्थित उदासीन ऋषि आश्रम में गुरु पर्व समारोह में हिस्सा लिया। करीब दो घंटे के प्रवास के दौरान उन्होंने संतों से मुलाकात की और आश्रम परिसर में बने नारायण संस्कृत महाविद्यालय के नए भवन का लोकार्पण किया।
आश्रम पहुंचने पर महंत डॉ. भरत दास महाराज ने रक्षा मंत्री का स्वागत किया। राजनाथ सिंह ने आश्रम परिसर में संतों की समाधियों का पूजन किया और संत-महंतों से संवाद किया। गुरु पर्व समारोह में उन्होंने गुरु परंपरा, भारतीय संस्कृति और संस्कृत शिक्षा के महत्व पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, विधायक, पूर्व सांसद समेत कई जनप्रतिनिधि और संत-महंत मौजूद रहे।
300 साल पुराने आश्रम की अपनी अनूठी कहानी
रानोपाली का उदासीन ऋषि आश्रम अपनी प्राचीन संत परंपरा और ऐतिहासिक मान्यताओं के लिए जाना जाता है। आश्रम के संस्थापक बाबा संगतबख्श महाराज माने जाते हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार बाबा ने जिस स्थान पर धूनी रमाई थी, वहां कभी नवाब शुजाउद्दौला की बेगम सैर के लिए आया करती थीं।

कहा जाता है कि बाबा को वहां से हटाने पहुंचे सिपाही उन्हें उनके आसन से हिला नहीं सके। स्थानीय कथा के मुताबिक बाबा जिस चबूतरे पर बैठे थे वह उनके आदेश पर घूमने लगा। सिपाहियों ने जब इसकी जानकारी बेगम को दी तो वह स्वयं बाबा के दर्शन करने पहुंचीं। मान्यता है कि बाबा से प्रभावित होकर उन्होंने आश्रम और संतों की सेवा के लिए करीब 500 बीघा भूमि दान की। इसी भूमि पर आगे चलकर आश्रम का विस्तार हुआ।
संस्कृत शिक्षा का भी प्रमुख केंद्र
उदासीन ऋषि आश्रम के विकास में तपस्वी कन्यण दास महाराज अमरकंटक की भी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। परिसर में मंदिरों, धर्मशाला, संत निवास और गौशाला के साथ संस्कृत पाठशाला भी संचालित होती है। महंत डॉ. भरत दास महाराज के अनुसार गुरु पर्व सनातन परंपरा में गुरु के प्रति श्रद्धा, समर्पण और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक है। गुरु समाज को संस्कार और सही दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
नारायण संस्कृत महाविद्यालय के नए भवन का लोकार्पण भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृत शिक्षा को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। गुरु पर्व समारोह के समापन के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अयोध्या से वापस रवाना हो गए।






