UP News: सड़क पर दौड़ रहीं अनफिट एंबुलेंस पर वार, 772 के चालान, 135 गाड़ियां सड़क से बाहर
मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाली अनफिट और अनधिकृत एंबुलेंस पर तीन दिन तक चला विशेष अभियान, वैध परमिट से लेकर फिटनेस प्रमाणपत्र तक की हुई जांच

लखनऊ, 11 अक्टूबर 2026:
यूपी में मरीजों की सुरक्षित यात्रा और सड़क सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। अनफिट और अनाधिकृत एंबुलेंस के खिलाफ चलाए गए तीन दिवसीय विशेष प्रवर्तन अभियान में विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 772 एंबुलेंस के चालान किए। 135 एंबुलेंस का संचालन बंद कराया गया। इस अभियान के जरिए विभाग ने साफ संकेत दिया है कि आपातकालीन सेवा के नाम पर नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
प्रदेश के परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन के अनुसार अभियान के दौरान विभागीय प्रवर्तन टीमों ने निजी क्षेत्र में संचालित एंबुलेंस की जांच की। इस दौरान निर्धारित नियमों और मानकों का उल्लंघन करने वाले वाहनों को चिह्नित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। अभियान का मकसद केवल यातायात नियमों का पालन कराना नहीं अपितु मरीजों को सुरक्षित और भरोसेमंद परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना भी है।
मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ नहीं होगा बर्दाश्त
एंबुलेंस को आपातकाल में मरीजों तक तत्काल चिकित्सा सहायता पहुंचाने का अहम माध्यम माना जाता है। ऐसे में वाहन की फिटनेस में कमी, जरूरी दस्तावेजों का अभाव या बिना वैध अनुमति के संचालन मरीजों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। परिवहन आयुक्त ने स्पष्ट किया कि एंबुलेंस जैसी संवेदनशील सेवा में वाहनों का तकनीकी रूप से फिट होना और सभी जरूरी दस्तावेजों का वैध होना अनिवार्य है।
परमिट से फिटनेस तक, नियमों का पालन जरूरी
परिवहन विभाग ने एंबुलेंस मालिकों और संचालकों से अपील की है कि वे वाहन सड़क पर उतारने से पहले पंजीकरण, वैध परमिट, फिटनेस प्रमाणपत्र और अन्य आवश्यक अभिलेखों की वैधता सुनिश्चित करें। निर्धारित मानकों के अनुरूप ही एंबुलेंस का संचालन किया जाए, ताकि आपात स्थिति में मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी न उठानी पड़े।
आगे भी जारी रहेगा अभियान
विभाग के मुताबिक अवैध और अनफिट वाहनों के खिलाफ प्रवर्तन अभियान आगे भी जारी रहेगा। इस कार्रवाई का मकसद एंबुलेंस सेवाओं में नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करने के साथ सड़क पर चलने वाले वाहनों की सुरक्षा बढ़ाना है। अब एंबुलेंस संचालकों की जिम्मेदारी है कि वे जरूरी मानकों को पूरा रखें। उनकी लापरवाही का खामियाजा किसी मरीज की जिंदगी पर भारी पड़ सकता है।






