Lucknow News : 84 के जख्मों को याद कर सिख समाज ने निकाला मार्च, दिल्ली रैली को बताया आहत करने वाला आयोजन
Sikh Community Protest : पीड़ित परिवारों के समर्थन में आलमबाग से टेढ़ी पुलिया तक निकाला विरोध मार्च, न्याय और सम्मान की मांग उठी, सिख संगठनों के प्रतिनिधि हुए शामिल

लखनऊ, 1 नवम्बर 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ में 1984 के सिख नरसंहार के पीड़ित परिवारों के समर्थन में सिख समाज ने रविवार को शांतिपूर्ण विरोध मार्च निकाला। समाज के प्रतिनिधियों ने दिल्ली में 1 नवम्बर को राजनीतिक रैली आयोजित करने के फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह तारीख नरसंहार में जान गंवाने वाले लोगों की याद से जुड़ी है। ऐसे में इस दिन राजनीतिक कार्यक्रम करने से प्रभावित परिवारों की भावनाएं आहत हो सकती हैं।
आलमबाग से टेढ़ी पुलिया तक निकला मार्च
विरोध मार्च की शुरुआत गुरुद्वारा आलमबाग स्थित साहिबजादा पार्क से हुई। इसमें अलग-अलग सिख संगठनों, गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटियों, सामाजिक संस्थाओं, व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ आम नागरिक भी शामिल हुए। मार्च खालसा चौक, टेढ़ी पुलिया पहुंचकर सभा में बदल गया।
राजनीतिक कार्यक्रम के फैसले पर उठाए सवाल
भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष आशीष सिंह तलवार ने कहा कि 1 नवम्बर 1984 की घटना सिख समाज के इतिहास का बेहद संवेदनशील हिस्सा है। इस तारीख पर राजनीतिक रैली आयोजित करने से पीड़ित परिवारों की भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक कार्यक्रम तय करते समय ऐतिहासिक घटनाओं से जुड़ी संवेदनशीलता का ध्यान रखना चाहिए।
न्याय की मांग आज भी बरकरार
निर्मल सिंह ने कहा कि 1 नवम्बर सिख समाज के लिए शोक, स्मरण और न्याय की मांग का दिन है। विरोध मार्च के जरिए 1984 के पीड़ित परिवारों के प्रति एकजुटता दिखाई गई। भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष गुरप्रीत सिंह बग्गा ने कहा कि नरसंहार से प्रभावित परिवारों को न्याय और सम्मान मिलना चाहिए। इस घटना की बरसी पर किसी भी राजनीतिक कार्यक्रम के आयोजन में परिवारों की भावनाओं का ध्यान रखना जरूरी है।

उत्तर प्रदेश सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के महासचिव सुरेन्द्र सिंह बक्शी ने कहा कि जिन परिवारों ने अपने लोगों को खोया है, उनकी पीड़ा को समझना समाज की जिम्मेदारी है। महासचिव रतपाल सिंह गोल्डी ने भी कहा कि पीड़ित परिवार आज तक न्याय और सम्मान की उम्मीद लगाए हुए हैं। राजनीतिक और सामाजिक संगठनों को इस तारीख की संवेदनशीलता समझते हुए अपने कार्यक्रम तय करने चाहिए।
रणबीर सिंह भसीन ने कहा कि 1984 की घटना से प्रभावित परिवारों की पीड़ा को समझना जरूरी है। उनके न्याय की मांग को लगातार उठाया जाना चाहिए। राजेन्द्र सिंह बग्गा लक्की ने कहा कि सिख समाज ने देश की एकता, अखंडता और मानवता की सेवा में अहम योगदान दिया है। विरोध मार्च का मकसद किसी तरह का टकराव पैदा करना नहीं, बल्कि पीड़ित परिवारों के प्रति समर्थन जताना था।
कई सिख प्रतिनिधि रहे मौजूद
पूर्व सह-मीडिया प्रभारी, अवध क्षेत्र भाजपा सतबीर सिंह राजू के मुताबिक मार्च में मनमोहन सिंह मोहनी, राजेन्द्र सिंह राजू, ओंकार सिंह पनेसर, भूपिन्दर सिंह पिन्दा, निरवैर सिंह, रणबीर सिंह कलसी, रणबीर सिंह भसीन, दिलमीत सिंह सेठी, टीपीएस तनेजा, त्रिलोक सिंह, परविन्दर सिंह, इकबाल सिंह, हरजीत सिंह, इन्द्र मोहन सिंह, परमजीत सिंह सहित कई सिख प्रतिनिधि शामिल हुए। खालसा चौक पर हुई सभा में वक्ताओं ने 1984 के पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताई। उन्होंने उनके लिए न्याय और सम्मान की मांग का समर्थन किया।






