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गोरखपुर की मंशा देवी बनीं महिला सशक्तिकरण की मिसाल, 60 महिलाओं को दिखाई आत्मनिर्भरता की राह

स्वयं सहायता समूह से जुड़कर एक वर्ष में मंशा देवी बनीं लखपति दीदी, अब 26 जनवरी को पीएम मोदी से दिल्ली में करेंगीं मुलाकात, आत्मनिर्भर बन मंशा देवी दूसरे ब्लॉकों की महिलाओं को भी बनाया आत्मनिर्भर

लखनऊ, 4 जनवरी 2026:

यूपी में महिला सशक्तिकरण अब केवल सरकारी घोषणाओं तक सीमित नहीं रहा बल्कि जमीन पर बदलाव की सशक्त कहानी बनकर उभर रहा है। सीएम योगी के विजन और योजनाओं का प्रभाव गोरखपुर की मंशा देवी के जीवन में साफ दिखाई देता है। उन्होंने स्वयं आत्मनिर्भर बनकर 60 से अधिक महिलाओं को रोजगार, सम्मान और आत्मविश्वास की नई दिशा दी है।

कभी सीमित आय और संसाधनों में जीवन यापन करने वाली मंशा देवी आज ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। इसके साथ ई-रिक्शा ट्रेनर के रूप में महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी हैं। स्वयं सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने एक वर्ष के भीतर अपनी पहचान बदली और अब 26 जनवरी को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने जा रही हैं।

मंशा देवी पहले समूह सखी के रूप में काम कर रही थीं लेकिन उनके पास आय का कोई स्थायी साधन नहीं था। मुख्यमंत्री के निर्देश पर शुरू किए गए सेफ मोबिलिटी प्रोग्राम से जुड़ने के बाद उनकी जिंदगी ने नई रफ्तार पकड़ी। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की मिशन निदेशक दीपा रंजन के निर्देशन में डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स और आजीविका मिशन के बीच हुए अनुबंध के तहत यह कार्यक्रम संचालित हो रहा है।

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आज मंशा देवी की मासिक आय 20 से 30 हजार रुपये तक पहुंच चुकी है। इससे सालाना ढाई से तीन लाख रुपये की कमाई हो रही है। वे प्रतिदिन 800 से 1000 रुपये तक अर्जित कर रही हैं। उन्होंने ब्रह्मपुर ब्लॉक सहित गोरखपुर जिले के अन्य ब्लॉकों की महिलाओं को ड्राइविंग, लाइसेंस प्रक्रिया और उद्यमिता का प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाया।

मुद्रा योजना से 1.25 लाख रुपये और ब्लॉक स्तर से मिले एक लाख रुपये के सहयोग ने उनके काम को और विस्तार दिया। इसके परिणामस्वरूप आज उनके समूह की 60 से अधिक महिलाएं सुरक्षित माहौल में दिन-रात ई-रिक्शा चला रही हैं। अपने परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।

सरकारी योजनाओं से मिले वित्तीय सहयोग और सुरक्षित परिवहन के माहौल ने ग्रामीण महिलाओं के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोले हैं। सड़कों पर आत्मविश्वास और स्वाभिमान के साथ ई-रिक्शा चलाती ये महिलाएं प्रदेश में बदले सामाजिक और आर्थिक वातावरण की जीवंत तस्वीर पेश कर रही हैं।

मंशा देवी की यात्रा यह साबित करती है कि सही नीति, प्रशिक्षण और अवसर मिलें तो ग्रामीण महिलाएं न केवल अपनी जिंदगी बदल सकती हैं, बल्कि पूरे समाज को आगे बढ़ाने की ताकत भी रखती हैं।

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