
लखनऊ, 31 जुलाई 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ जल्द ही भारतीय सेना की अदम्य वीरता और शौर्य के एक आधुनिक प्रतीक के रूप में भी पहचाना जाएगा। शहर पॉश एरिया गोमतीनगर स्थित नेहरू इन्क्लेव के पास खाली पड़ी जमीन पर करीब 125 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक वॉर म्यूजियम और विश्वस्तरीय कन्वेंशन सेंटर विकसित करने की तैयारी चल रही है। स्थानीय सांसद एवं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की पहल पर लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना का प्रस्ताव तैयार किया है। इससे राजधानी को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
प्रस्ताव के अनुसार सेना अपने कब्जे वाली 33.97 एकड़ भूमि एलडीए को हस्तांतरित करेगी। इसमें 12.87 एकड़ क्षेत्र में वॉर म्यूजियम और कन्वेंशन सेंटर का निर्माण किया जाएगा। 14 एकड़ भूमि को हरित क्षेत्र (ग्रीन बेल्ट) के रूप में विकसित किया जाएगा। शेष 7.10 एकड़ भूमि पर व्यावसायिक एवं मिश्रित उपयोग के भूखंड विकसित किए जाएंगे। उनकी बिक्री से परियोजना के निर्माण की लागत का बड़ा हिस्सा निकाला जाएगा।
एलडीए के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि इस संबंध में शासन स्तर पर बैठक में प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा हुई। सेना से औपचारिक सहमति मिलने के बाद एलडीए दो वर्ष के भीतर इस परियोजना को पूरा करने का लक्ष्य लेकर चलेगा। निर्माण के बाद परिसर का संचालन भी एलडीए ही करेगा।
प्रस्तावित वॉर म्यूजियम भारतीय सशस्त्र सेनाओं के गौरवशाली इतिहास को आधुनिक तकनीक के माध्यम से आम लोगों के सामने प्रस्तुत करेगा। संग्रहालय में प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध, 1947-48, 1962, 1965, 1971 के युद्ध, कारगिल विजय सहित भारतीय सैन्य इतिहास के महत्वपूर्ण अध्यायों को डिजिटल तकनीक, प्रोजेक्शन मैपिंग, इंटरैक्टिव डिस्प्ले और अत्याधुनिक ऑडियो-विजुअल माध्यमों से जीवंत बनाया जाएगा। इसके अलावा ऑपरेशन सिंदूर, बालाकोट, उरी, सियाचिन, भारतीय नौसेना और वायुसेना की उपलब्धियों तथा सैन्य परंपराओं पर आधारित विशेष गैलरियां भी आकर्षण का केंद्र होंगी।

परियोजना में संग्रहालय के साथ ही विश्वस्तरीय कन्वेंशन सेंटर, 270 डिग्री इमर्सिव ऑडिटोरियम, रक्षा उपकरणों की ओपन एयर प्रदर्शनी, हेलीकॉप्टर एवं टैंक सिम्युलेटर, डिजिटल इंटरैक्टिव जोन और सैन्य स्मृति वस्तु केंद्र भी विकसित किए जाएंगे। इससे युवाओं को भारतीय सशस्त्र सेनाओं के इतिहास और कार्यशैली को करीब से जानने का अवसर मिलेगा। रक्षा सेवाओं को करियर के रूप में अपनाने के लिए प्रेरणा भी मिलेगी।
एलडीए का मानना है कि यह परियोजना लखनऊ में पर्यटन, रोजगार, निवेश और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति देगी। इसके साथ ही राजधानी को देश के प्रमुख रक्षा-पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन स्थलों की सूची में शामिल करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।






