तीन साल, न रिजल्ट न नौकरी! फूटा अभ्यर्थियों का गुस्सा, UPSSSC के बाहर प्रदर्शन
जूनियर असिस्टेंट और ग्राम पंचायत अधिकारी भर्ती परीक्षा का परिणाम जारी करने की मांग, लखनऊ में बोले अभ्यर्थी- अब सिर्फ आश्वासन नहीं, नियुक्ति चाहिए

लखनऊ, 22 जून 2026:
उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) की लंबित भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर सोमवार को राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर स्थित पिकअप भवन के बाहर अभ्यर्थियों का गुस्सा खुलकर सामने आया। जूनियर असिस्टेंट भर्ती के सैकड़ों अभ्यर्थियों ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए आयोग के खिलाफ नारेबाजी की और जल्द परिणाम घोषित कर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने की मांग उठाई।
प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे अभ्यर्थियों का कहना था कि भर्ती प्रक्रिया शुरू हुए तीन साल से अधिक का समय बीत चुका है लेकिन अब तक न तो परिणाम जारी हुआ है और न ही नियुक्ति की कोई स्पष्ट समय-सीमा बताई गई है। उनका आरोप है कि भर्ती के हर चरण में देरी के कारण हजारों युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि आवेदन भरने के बाद से ही उन्हें लगातार आंदोलन का सहारा लेना पड़ रहा है। पहले वैकेंसी को लेकर संघर्ष करना पड़ा, फिर परीक्षा आयोजित कराने के लिए आवाज उठानी पड़ी और अब परीक्षा पूरी होने के बावजूद रिजल्ट जारी कराने के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। उनका कहना है कि आयोग की सुस्त कार्यशैली से अभ्यर्थियों का धैर्य जवाब देने लगा है।
अभ्यर्थियों के अनुसार पीईटी-2022 के आधार पर निकाली गई 1468 पदों की ग्राम पंचायत अधिकारी भर्ती तथा 5512 पदों की जूनियर असिस्टेंट भर्ती का परिणाम अब तक घोषित नहीं किया गया है। लगातार हो रही देरी से हजारों उम्मीदवार मानसिक, आर्थिक और सामाजिक दबाव झेल रहे हैं। उनका कहना है कि वर्षों की मेहनत और परीक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद उन्हें नौकरी का इंतजार करना पड़ रहा है।

प्रदर्शन में शामिल युवाओं ने बताया कि वे समय-समय पर अलग-अलग जिलों से लखनऊ आकर आयोग के अधिकारियों से मिलते और अपनी मांग रखते रहे हैं। हर बार जल्द कार्रवाई का आश्वासन तो मिलता है लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस प्रगति दिखाई नहीं देती। इससे अभ्यर्थियों में असंतोष लगातार बढ़ रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने आयोग से लंबित भर्तियों का परिणाम तत्काल घोषित कर नियुक्ति प्रक्रिया निर्धारित समय में पूरी करने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।






