Uttarakhand

BIS के स्थापना दिवस में पहुंचे धामी, कहा… इकोलॉजी और इकॉनमी के बीच संतुलन बना रहा ब्यूरो

उद्योग से लेकर स्वास्थ्य और डिजिटल सेवाओं तक मानकों की अहम भूमिका, देहरादून में आयोजित हुआ कार्यक्रम

योगेंद्र मलिक

देहरादून, 6 जनवरी 2026:

भारतीय मानक ब्यूरो के 79वें स्थापना दिवस के मौके पर देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में हुए इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि गुणवत्ता आधारित सोच और कामकाज की संस्कृति को बढ़ावा देना आज की सबसे बड़ी जरूरत है। thehohalla news 

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय मानक ब्यूरो ने पिछले करीब आठ दशकों में गुणवत्ता, भरोसे और उपभोक्ता सुरक्षा के क्षेत्र में मजबूत पहचान बनाई है। मानकीकरण और प्रमाणीकरण के जरिए न सिर्फ उद्योगों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया गया, बल्कि आम लोगों के जीवन में भी सुरक्षा और भरोसे का एहसास मजबूत हुआ है।

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उद्योग से आगे बढ़ा मानकीकरण

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज मानकीकरण सिर्फ उद्योग तक सीमित नहीं है। यह खेती, स्वास्थ्य सेवाओं, सड़क सुरक्षा, ऊर्जा, जल संरक्षण, आपदा प्रबंधन और डिजिटल सेवाओं तक फैल चुका है। बीआईएस की ओर से मेडिकल डिवाइस, ड्रोन, इलेक्ट्रिक वाहन, डिजिटल सुरक्षा, रिसाइकिल सामग्री और हरित ऊर्जा जैसे नए क्षेत्रों में तय किए गए मानक भविष्य की जरूरतों के मुताबिक हैं। उन्होंने कहा कि सतत विकास के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए बीआईएस इकोलॉजी और इकॉनमी के बीच संतुलन बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है।

उत्तराखंड में गुणवत्ता पर खास फोकस

मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड में बीआईएस लोक निर्माण विभाग, आपदा प्रबंधन, एमडीडीए और यूपीसीएल जैसे विभागों के साथ मिलकर मानकीकरण को लेकर जागरूकता बढ़ा रहा है। राज्य सरकार भी हस्तशिल्प, जैविक उत्पाद, औषधीय जड़ी-बूटियों और स्थानीय खाद्य पदार्थों के लिए उच्च गुणवत्ता मानक तय करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि हाउस ऑफ हिमालयाज ब्रांड के जरिए राज्य के पारंपरिक उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की कोशिश की जा रही है।

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विज्ञान और नवाचार को मिल रही रफ्तार

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य के सभी 13 जिलों के 95 ब्लॉकों में करीब 180 विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित आधारित प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं। हर जिले में साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रीमियर लीग शुरू की गई है और लैब ऑन व्हील्स के जरिए विज्ञान को दूर-दराज के इलाकों तक पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों में 60 पेटेंट सूचना केंद्र बनाए गए हैं। सीमांत इलाकों के विकास के लिए सीमांत क्षेत्र विकास परिषद का गठन किया गया है। साइंस महोत्सव अब पहाड़ी जिलों तक पहुंच चुका है और इस साल इसका आयोजन रुद्रप्रयाग में हुआ।

साइंस सिटी और अंतरराष्ट्रीय पहचान

मुख्यमंत्री ने बताया कि देहरादून में देश की पांचवीं साइंस सिटी के निर्माण कार्य ने रफ्तार पकड़ ली है। भारत सरकार और राज्य सरकार के सहयोग से 175 करोड़ रुपये की इस परियोजना पर काम चल रहा है। महिला प्रौद्योगिकी केंद्रों की स्थापना भी शुरू हो चुकी है। उन्होंने सिलक्यारा सुरंग रेस्क्यू अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि वहां अपनाए गए विज्ञान और तकनीक आधारित मॉडल को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली है और इसी पर आधारित विश्व आपदा प्रबंधन सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है।

कार्यक्रम में विधायक खजान दास, उमेश शर्मा काऊ, सविता कपूर, भारतीय मानक ब्यूरो के निदेशक सौरभ तिवारी, यू-कॉस्ट के महानिदेशक प्रोफेसर दुर्गेश पंत, ब्रिगेडियर के. जी. बहल और उद्योग व व्यापार संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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