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UP में बंदरों के हमलों पर लगेगा ब्रेक : शासन का बड़ा फैसला, वन विभाग संभालेगा मोर्चा

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया निर्णय, अब वन विभाग की होगी बंदरों के पकड़ने, प्रबंधन और पुनर्वास की पूरी जिम्मेदारी, एक माह में प्रदेश के लिए कार्ययोजना तैयार करने की हिदायत

लखनऊ, 18 जनवरी 2026:

यूपी के शहरों में बंदरों की बढ़ती सक्रियता और उनके हमलों से परेशान लोगों के लिए राहत की खबर है। लंबे समय से बंदर पकड़ने को लेकर विभागों के बीच चली आ रही खींचतान पर आखिरकार विराम लग गया है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में यह स्पष्ट निर्णय लिया गया कि बंदरों के पकड़ने, प्रबंधन और पुनर्वास की पूरी जिम्मेदारी अब वन विभाग की होगी।

बैठक में साफ किया गया कि बंदर वन्यजीवों की श्रेणी में आते हैं। उनके व्यवहार, नियंत्रण तथा पुनर्वास से जुड़ी विशेषज्ञता पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के पास उपलब्ध है। इसी आधार पर यह जिम्मेदारी वन विभाग को सौंपी गई है। साथ ही निर्देश दिए गए हैं कि वन विभाग एक माह के भीतर प्रदेश के लिए समेकित कार्ययोजना तैयार करे जिससे समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सके। आवश्यकता पड़ने पर अन्य विभागों का सहयोग भी सुनिश्चित किया जाएगा।

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मालूम हो कि बंदरों का आतंक अब केवल राजधानी लखनऊ तक सीमित नहीं रह गया। यह पूरे प्रदेश में गंभीर समस्या का रूप ले चुका है। आए दिन बंदरों के हमले और काटने की घटनाएं सामने आ रही थीं। इसके बावजूद जिम्मेदारी तय न होने के कारण ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही थी। नगर निगम और वन विभाग के बीच इसे लेकर कई बार पत्राचार हुआ और मामला मुख्यमंत्री कार्यालय तक भी पहुंचा। अंततः शासन स्तर पर हस्तक्षेप करते हुए स्थिति को स्पष्ट किया गया।

लंबे समय से बंदर पकड़ने को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। दोनों विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे जिसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ा। ताजा शासनादेश को लाखों नागरिकों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है। बंदरों के काटने के मामलों में रैबीज का खतरा बना रहता है। अकेले लखनऊ में प्रतिदिन कई मामले सामने आते हैं। हालांकि घायलों का कोई समेकित आधिकारिक आंकड़ा अब तक उपलब्ध नहीं है।

शासनादेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि नगर निगम की जिम्मेदारी केवल उन पशु-पक्षियों तक सीमित है जिनसे गंदगी या सार्वजनिक असुविधा होती है। जैसे छुट्टा पशु या लावारिस कुत्ते। बंदर वन्यजीव हैं जिनके प्रबंधन के लिए विशेष प्रशिक्षण और विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है। यह वन विभाग के पास उपलब्ध है।

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