लखनऊ/चित्रकूट, 7 फरवरी 2026:
आज के दौर में बच्चों का एडमिशन बड़े-बड़े निजी स्कूलों में करवाना सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक बनता जा रहा है। ऐसे समय में चित्रकूट से एक ऐसी प्रेरक पहल सामने आई है जो समाज की सोच को नई दिशा देने का काम कर रही है। चित्रकूट के डीएम पुलकित गर्ग ने सिर्फ आदेश जारी करने तक खुद को सीमित नहीं रखा बल्कि अपने आचरण से एक मजबूत संदेश दिया है।
डीएम गर्ग ने चित्रकूट के धनुष चौराहा स्थित कंपोजिट विद्यालय परिसर में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र में अपनी सवा तीन साल की पुत्री सिया का नामांकन कराकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि सरकारी व्यवस्थाओं पर भरोसा केवल भाषणों तक सीमित नहीं होना चाहिए। उनका यह कदम साबित करता है कि सरकारी आंगनबाड़ी केंद्र और विद्यालय किसी भी मायने में निजी संस्थानों से कमतर नहीं हैं।

डीएम पुलकित गर्ग का कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्रों में छोटे बच्चों के लिए शिक्षा, खेल, पोषण और देखभाल की समुचित व्यवस्था उपलब्ध है। उन्होंने आम जनता, कर्मचारियों और अभिभावकों से अपील की कि वे दिखावे की दौड़ से बाहर निकलें और सरकार द्वारा संचालित योजनाओं व संस्थानों पर विश्वास करें।
डीएम के इस फैसले से न सिर्फ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा है बल्कि आम लोगों के बीच भी सरकारी शिक्षा व्यवस्था को लेकर भरोसा मजबूत हुआ है। डीएम का यह निर्णय केवल एक औपचारिक प्रवेश प्रक्रिया नहीं बल्कि समाज को सही दिशा दिखाने वाला सकारात्मक संदेश है। यही कारण है कि आज चित्रकूट के डीएम की यह पहल चर्चा का विषय बनी हुई है और अन्य जिलों के लिए भी एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत कर रही है।






