देहरादून, 24 फरवरी 2026:
उत्तराखंड में पलायन रोकने और सीमांत इलाकों के विकास को लेकर मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना और मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम की अनुवीक्षण समिति की बैठक हुई। बैठक में साफ निर्देश दिए गए कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी स्तर पर ढिलाई या गैप नहीं रहना चाहिए और जिलों से आने वाले प्रस्ताव तय समयसीमा के भीतर मंजूर कर काम तेजी से आगे बढ़ाया जाए।
मुख्य सचिव ने कहा कि सिर्फ कागजी प्रगति नहीं बल्कि योजनाओं का असर जमीन पर दिखना जरूरी है। पुराने कामों की समीक्षा करते हुए उन्होंने अधिकारियों से कहा कि हर योजना का वास्तविक परिणाम सामने आना चाहिए, ताकि लोगों को रोजगार और आजीविका के मौके मिल सकें।

बैठक में योजनाओं के लिए टारगेटेड अप्रोच अपनाने पर खास जोर दिया गया। निर्देश दिए गए कि जिन गांवों में ये योजनाएं चल रही हैं, उन्हें स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता के मॉडल गांव के रूप में विकसित किया जाए। साथ ही सीमांत क्षेत्रों में उपलब्ध संसाधनों और कमियों का वैज्ञानिक अध्ययन कर उसी हिसाब से योजनाएं लागू करने को कहा गया।
पलायन आयोग के उपाध्यक्ष एस.एस. नेगी ने बताया कि योजनाओं का असर दिख रहा है, लेकिन क्रियान्वयन को और मजबूत करने की जरूरत है। वर्ष 2025-26 में मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना के तहत 12 जिलों में 90 योजनाएं प्रस्तावित हैं, जबकि मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम के तहत पांच सीमांत जिलों के चयनित विकासखंडों में 155 योजनाओं पर काम प्रस्तावित है।
बताया गया कि पलायन रोकथाम योजना प्रदेश के 474 पलायन प्रभावित गांवों में परिवारों, बेरोजगार युवाओं और वापस लौटे लोगों को स्वरोजगार से जोड़ने पर केंद्रित है। वहीं सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम के जरिए सीमावर्ती इलाकों में स्थायी आजीविका के साधन तैयार कर पलायन रोकने और रिवर्स माइग्रेशन को बढ़ावा दिया जा रहा है। बैठक में सचिव सचिन कुर्वे, डीएस गब्रियाल, विशेष सचिव निवेदिता कुकरेती, अपर सचिव अनुराधा पाल, झरना कमठान, वन विभाग के हॉफ रंजन कुमार मिश्र सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।






