लखनऊ, 6 मार्च 2026:
उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तीकरण को नई दिशा देने वाली योगी सरकार की ‘विद्युत सखी योजना’ ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आर्थिक और सामाजिक बदलाव की नई कहानी लिख रही है। इस योजना के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं न केवल अपने गांवों में बिजली सेवाओं को सुलभ बना रहीं बल्कि आर्थिक रूप से भी मजबूत बन रही हैं।
योजना की सफलता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अब तक विद्युत सखियों ने 3,250 करोड़ रुपये से अधिक का बिजली बिल संग्रह कर एक उल्लेखनीय रिकॉर्ड कायम किया है। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में महिला सशक्तीकरण का एक प्रभावी मॉडल बनकर उभरी है।
प्रदेश में फिलहाल करीब 30 हजार महिलाओं को विद्युत सखी के रूप में पंजीकृत किया जा चुका है। इनमें से 15 हजार से अधिक महिलाएं सक्रिय रूप से फील्ड में काम कर रही हैं और घर-घर जाकर उपभोक्ताओं से बिजली बिल जमा करवा रही हैं। सरकार का लक्ष्य है कि प्रशिक्षण और अन्य औपचारिकताएं पूरी होने के बाद बाकी महिलाओं को भी जल्द ही फील्ड में उतारा जाए जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा सेवाओं को और मजबूत बनाया जा सके।
इस योजना ने ग्रामीण महिलाओं के लिए सम्मानजनक आय का नया माध्यम तैयार किया है। योजना के तहत विद्युत सखियों को दो हजार रुपये तक के बिजली बिल संग्रह पर 20 रुपये का कमीशन, जबकि दो हजार रुपये से अधिक के बिल पर एक प्रतिशत कमीशन दिया जाता है। नियमित काम और मेहनत के दम पर हजारों महिलाएं अब अच्छी आय अर्जित कर रही हैं और कई ‘दीदियां’ लखपति बनने की दिशा में आगे बढ़ चुकी हैं।
इस पहल का लाभ ग्रामीण उपभोक्ताओं को भी मिल रहा है। पहले जहां बिजली बिल जमा करने के लिए लंबी कतारों में लगना पड़ता था, वहीं अब गांवों में ही घर-घर जाकर बिल जमा हो रहा है। इससे उपभोक्ताओं का समय बच रहा है और भुगतान प्रक्रिया भी आसान हो गई है। ‘विद्युत सखी योजना’ ने ग्रामीण महिलाओं को रोजगार, आत्मनिर्भरता और सम्मान देने के साथ-साथ गांवों में ऊर्जा सेवाओं को भी अधिक प्रभावी और सुगम बना दिया है। यह योजना उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तीकरण की एक प्रेरणादायक मिसाल बनकर उभरी है।






