हरेंद्र धर दुबे
गोरखपुर, 19 मार्च 2026:
चैत्र नवरात्रि के पहले दिन चौरीचौरा इलाके में स्थित तरकुलहा माता मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। सुबह से ही भक्तों का आना शुरू हो गया। जीर्णोद्धार के बाद सजे संवरे मंदिर में मां का रूप श्रद्धालुओं का मन मोह रहा है। मंदिर में आसपास जिलों के साथ अन्य राज्यों से लोग पहुंचकर पूजन-दर्शन कर रहे हैं। इस मंदिर का इतिहास आजादी की लड़ाई में शामिल रहे शहीद बाबू बंधु सिंह से जुड़ा है।
गोरखपुर शहर से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित इस मंदिर में लोग अपनी मनोकामना लेकर आते हैं और पूरी होने पर फिर दर्शन के लिए लौटते हैं। बताया जाता है कि आजादी के समय क्रांतिकारी बाबू बंधु सिंह ने अंग्रेजों से बचने के दौरान जंगल में तरकुल के पेड़ों के बीच मां की पिंडी स्थापित की थी। बाबू बंधु सिंह यहां अंग्रेज अफसरों की बलि देते थे। पकड़े जाने के बाद उन्हें फांसी हुई। फांसी देते ही तरकुल से खून की धार निकल पड़ी। उसी के बाद से यह स्थान श्रद्धा का बड़ा केंद्र बन गया।

हर साल चैत्र व शारदीय नवरात्रि में बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं। इस बार भी पहले ही दिन लंबी कतारें लगी रहीं और लोग पूरे श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना करते नजर आए। पुजारी पंडित दिनेश मिश्रा के मुताबिक नवरात्रि में यहां हर दिन भक्तों की भीड़ बढ़ती जाती है। लोगों का मानना है कि मां सबकी मनोकामना पूरी करती हैं, इसलिए यहां दूर-दूर से लोग आते हैं।
दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं में रमेश ने बताया कि वह पिछले पांच साल से लगातार यहां आ रहे हैं। वहीं सुबोध ने कहा कि वह करीब 35 साल से हर नवरात्रि में माता के दर्शन करने आते हैं। नंदिनी ने बताया कि इस मंदिर की मान्यता बहुत पुरानी है, इसलिए लोगों की आस्था लगातार बढ़ रही है। शशि अपने परिवार के साथ पूजा करने पहुंचीं। उनका कहना है कि यह बहुत जागृत स्थान है। वहीं वाराणसी से आई प्रेमपूजा ने बताया कि मंदिर के बारे में काफी सुना था, इसलिए इस बार नवरात्रि के पहले दिन ही दर्शन करने आईं हैं।






