लखनऊ, 23 मार्च 2026:
उत्तर प्रदेश ने बीते नौ साल में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में जबरदस्त छलांग लगाई है। कभी करीब 400 मेगावाट तक सीमित रही क्षमता अब 5000 मेगावाट से आगे निकल चुकी है। सरकार की नई नीतियों, बड़े प्रोजेक्ट्स और लोगों की बढ़ती भागीदारी ने इस बदलाव को जमीन पर उतार दिया है।
उत्तर प्रदेश अब सिर्फ पारंपरिक ऊर्जा पर निर्भर नहीं रहा। सौर ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे विकल्पों के जरिए राज्य ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनने की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। सबसे बड़ा असर रूफटॉप सोलर पर देखने को मिला है। प्रदेश में अब तक चार लाख से ज्यादा घरों और संस्थानों की छतों पर सोलर प्लांट लग चुके हैं। इससे लोगों को सस्ती बिजली मिल रही है और बिजली बिल में अच्छी-खासी बचत भी हो रही है। 2017 से पहले हालात अलग थे। सौर ऊर्जा का दायरा सीमित था, निवेश कम था और लोगों में जागरूकता भी ज्यादा नहीं थी। नीतियों में स्पष्टता की कमी के चलते बड़े प्रोजेक्ट्स आगे नहीं बढ़ पा रहे थे।
इसके बाद हालात बदले। सौर ऊर्जा नीति 2017 और फिर 2022 लागू होने के बाद राज्य में तेजी आई। बड़े सोलर पार्क, ग्राउंड प्रोजेक्ट्स और खास तौर पर रूफटॉप सोलर ने इस सेक्टर को नई दिशा दी। पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ने भी इस बदलाव को आम लोगों तक पहुंचाने में अहम रोल निभाया। सब्सिडी मिलने से लोगों ने तेजी से अपने घरों में सोलर सिस्टम लगवाए। इससे हर महीने करीब 1500 से 3000 रुपये तक की बचत हो रही है। कई जगह लोग नेट मीटरिंग के जरिए अतिरिक्त बिजली बेचकर कमाई भी कर रहे हैं।
राज्य सरकार ने अब सौर ऊर्जा को और आगे ले जाने का लक्ष्य तय किया है। 2022 की नीति के तहत 22000 मेगावाट क्षमता हासिल करने की तैयारी है। इसके लिए बड़े सोलर पार्क और सरकारी इमारतों पर सोलर लगाने पर जोर दिया जा रहा है। ऊर्जा के नए विकल्पों पर भी काम शुरू हो चुका है। ग्रीन हाइड्रोजन को लेकर प्रदेश में शुरुआती प्रोजेक्ट्स लगाए जा रहे हैं। गोरखपुर में एक पायलट प्रोजेक्ट तैयार हो रहा है, जबकि रामपुर में भी प्लांट पर काम चल रहा है।
सौर ऊर्जा के बढ़ते इस्तेमाल का असर पर्यावरण पर भी दिख रहा है। कार्बन उत्सर्जन घटा है और साफ ऊर्जा का दायरा बढ़ा है। साथ ही इस सेक्टर में युवाओं के लिए रोजगार के नए मौके भी बने हैं। अब सोलर बिजली सिर्फ लाइट या पंखे तक सीमित नहीं रही। लोग इससे इंडक्शन पर खाना बना रहे हैं, इलेक्ट्रिक स्कूटर और कार चार्ज कर रहे हैं। इससे पेट्रोल, डीजल और गैस पर निर्भरता भी धीरे-धीरे कम हो रही है।






