Gorakhpur

महासप्तमी पर मां कालरात्रि की आराधना, मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की आस्था

गोरखपुर के दाऊदपुर स्थित प्राचीन मां कालिका मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना, भक्तों ने मां से मांगी सुख-समृद्धि, महासप्तमी के दिन नीले रंग के वस्त्र पहनने की परंपरा

हरेंद्र धर दुबे

गोरखपुर, 25 मार्च 2026:

चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन महासप्तमी के अवसर पर मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा-अर्चना की जा रही है। शहर के मंदिरों में सुबह से ही भक्त पूजा करने पहुंचने लगे। महानगर के दाऊदपुर मोहल्ले में स्थित प्राचीन मां कालिका मंदिर में भक्तों ने विधि-विधान से मां कालरात्रि का पूजन कर सुख-समृद्धि की कामना की।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां कालरात्रि अपने भक्तों के लिए अत्यंत शुभ फल देने वाली हैं। यही कारण है कि उन्हें शुभंकारी भी कहा जाता है। मान्यता है कि माता पार्वती ने जब शुंभ-निशुंभ का वध करने के लिए अपना स्वर्णिम रूप त्यागा तभी उनका यह कालरात्रि स्वरूप प्रकट हुआ।

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मां कालरात्रि की चार भुजाएं हैं। दाहिने हाथों में वरद और अभय मुद्रा जबकि बाएं हाथों में लोहे का कांटा और खड़ग होता है। भक्तों का विश्वास है कि मां के स्मरण मात्र से भय, संकट और नकारात्मक शक्तियां दूर हो जाती हैं।
महासप्तमी के दिन नीले रंग के वस्त्र पहनने की विशेष परंपरा है। मंदिरों में बड़ी संख्या में भक्त नीले और ग्रे रंग के कपड़ों में नजर आए।

धार्मिक दृष्टि से नीला रंग साहस, स्थिरता और आत्मविश्वास का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस दिन मां कालरात्रि की आराधना करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सभी बाधाएं दूर होती हैं।

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