राजकिशोर तिवारी
ऋषिकेश, 6 अप्रैल 2026:
उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध श्री बद्रीनाथ धाम के कपाट इस वर्ष 23 अप्रैल को प्रातः 6:15 बजे श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ विधिवत खोल दिए जाएंगे। कपाट खुलने से पहले परंपरानुसार निकलने वाली गाडू घड़ा (तेल कलश) यात्रा 7 अप्रैल से शुरू होगी। इसे लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। यह यात्रा बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति और डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की जा रही है।
यात्रा का शुभारंभ नरेंद्र नगर राजदरबार से महाराजा मनुजयेंद्र शाह द्वारा किया जाएगा। इस दौरान राजमहल में महारानी मालाराज्य लक्ष्मी शाह और सुहागिन महिलाएं पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार तिलों का तेल तैयार कर कलश को डिमरी पंचायत को सौंपेंगी। यह तेल विशेष धार्मिक महत्व रखता है। भगवान बद्रीविशाल के अभिषेक में प्रयोग किया जाता है।
यात्रा 7 अप्रैल की रात्रि को ऋषिकेश पहुंचेगी और वहां रेलवे रोड स्थित चेला चेतराम धर्मशाला में इसका रात्रि विश्राम होगा। 8 अप्रैल की सुबह श्रद्धालु तेल कलश के दर्शन कर सकेंगे। इसके बाद पूजा-अर्चना और प्रसाद वितरण के उपरांत यात्रा लक्ष्मण झूला होते हुए श्रीनगर गढ़वाल के लिए प्रस्थान करेगी।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार यात्रा विभिन्न पड़ावों से गुजरते हुए 19 अप्रैल को पाखी गांव, 20 अप्रैल को नृसिंह मंदिर ज्योतिर्मठ और रविग्राम तथा 21 अप्रैल को पांडुकेश्वर में रात्रि विश्राम करेगी। 22 अप्रैल की शाम तक यात्रा श्री बद्रीनाथ धाम पहुंच जाएगी।
यात्रा के धाम पहुंचने के अगले दिन 23 अप्रैल को वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। इस अवसर पर मंदिर समिति के अध्यक्ष और डिमरी पंचायत के पदाधिकारी भी मौजूद रहेंगे। बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा को गति मिलेगी और क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियों के साथ श्रद्धालुओं की आवाजाही में भी वृद्धि होने की उम्मीद है।






