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मलिहाबादी आम : युद्ध की कड़वाहट से खतरे में मिठास, बागवानों को सता रहा एक्सपोर्ट संकट

अमेरिका-ईरान के रिश्ते सुधरने की राह तक रहे बागवान, कम पैदावार से अच्छे दाम की उम्मीद जगी थी, अब ट्रांसपोर्ट व निर्यात पर संकट के बादल, खाड़ी बाजार अटका तो लोकल में सस्ते बिक सकते हैं दशहरी, लंगड़ा और सफेदा आम

प्रमोद कुमार

मलिहाबाद (लखनऊ), 23 अप्रैल 2026:

तीखी धूप में पक रहे मलिहाबाद के दशहरी, लंगड़ा और सफेदा आम इस बार बागवानों के लिए राहत नहीं, चिंता लेकर आए हैं। मई के दूसरे हफ्ते से बाजार में आम की आवक शुरू होनी है, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पूरे कारोबार पर अनिश्चितता डाल दी है।

इस बार बे मौसम बारिश ने फसल पर बड़ा असर डाला है। बागवानों के मुताबिक आम की पैदावार करीब 60 से 70 फीसदी तक कम रहने का अनुमान है। ऐसे में उन्हें उम्मीद थी कि कम माल के चलते दाम बेहतर मिलेंगे और नुकसान कुछ हद तक संभल जाएगा, लेकिन अब हालात बदलते दिख रहे हैं।

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चिंता की सबसे बड़ी वजह हार्मुज स्ट्रेट पर बना तनाव है। अगर हालात बिगड़े तो तेल टैंकरों की आवाजाही पर असर पड़ सकता है। इसका सीधा असर देश में डीजल-पेट्रोल की कीमतों पर पड़ेगा और ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ जाएगी।

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मलिहाबाद के आम उत्पादक संजीत सिंह बताते हैं कि फसल तैयार हो रही है, लेकिन अगर ढुलाई प्रभावित हुई तो आम बड़ी मंडियों तक नहीं पहुंच पाएगा। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता जैसे बाजारों के साथ खाड़ी देशों में होने वाला निर्यात भी रुक सकता है। हर साल यहां से बड़ी मात्रा में आम बाहर भेजा जाता है।

बागवानों का कहना है कि अगर माल बाहर नहीं जा पाया तो पूरा दबाव लोकल बाजार पर आ जाएगा। ज्यादा सप्लाई होने से दाम गिरने का खतरा है। इस बार जो आम 80 से 100 रुपये किलो तक बिक सकता था, वही 10 से 20 रुपये किलो तक सिमटने की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल बागों में आम पक रहे हैं, लेकिन बागवान बाजार की दिशा को लेकर असमंजस में हैं।

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