लखनऊ, 2 मई 2026:
उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे अब सिर्फ तेज रफ्तार सड़कों तक सीमित नहीं रह गए हैं। निर्माण से लेकर संचालन तक पूरी व्यवस्था को तकनीक के सहारे नया रूप दिया जा रहा है। एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट अब एआई आधारित निगरानी और डेटा पर आधारित फैसलों की दिशा में आगे बढ़ चुके हैं।
इसके लिए उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा स्विट्जरलैंड की ईटीएच ज्यूरिख और आरटीडीटी लैबोरेट्रीज एजी के साथ साझेदारी इसी बदलाव का हिस्सा है। गंगा एक्सप्रेसवे में भी इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा चुका है।
निर्माण के साथ ही क्वालिटी पर नजर
अब तक सड़क बनने के बाद उसकी जांच होती थी, जिससे खामियां देर से सामने आती थीं। नई व्यवस्था में सेंसर आधारित सिस्टम के जरिए निर्माण के दौरान ही हर परत की निगरानी हो रही है। इससे जहां कमी तुरंत पकड़ी जा रही है, वहीं उसी समय उसे ठीक भी किया जा रहा है।
सड़क की असली हालत का सटीक आकलन
इस तकनीक में एक खास वाहन का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसमें सात एक्सेलेरोमीटर सेंसर लगे हैं। यह वाहन हर लेन पर चलकर सड़क की सतह, ऊंचाई के उतार-चढ़ाव और कंपन से जुड़ा डेटा जुटाता है। इससे सड़क की रियल कंडीशन का वैज्ञानिक आकलन सामने आता है, जो पारंपरिक जांच से कहीं ज्यादा सटीक माना जा रहा है।
डेटा तय करेगा सड़क की रेटिंग
सेंसर से मिले डेटा को एआई सॉफ्टवेयर प्रोसेस करता है और सड़क की गुणवत्ता को एक्सीलेंट, गुड और पुअर जैसी कैटेगरी में बांट देता है। इससे निर्माण एजेंसियों की जवाबदेही तय हो रही है। सिस्टम इतनी बारीकी से काम करता है कि छोटी से छोटी खामी भी पकड़ में आ जाती है।
स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम से बढ़ेगी सुरक्षा
तकनीक का इस्तेमाल सिर्फ निर्माण तक सीमित नहीं है। एक्सप्रेसवे पर एआई कैमरे लगाए जा रहे हैं जो ओवरस्पीडिंग, गलत लेन में गाड़ी चलाने जैसे उल्लंघन खुद पहचान लेंगे। इससे ट्रैफिक कंट्रोल मजबूत होगा और हादसों पर भी लगाम लगेगी।
इंफ्रास्ट्रक्चर से आगे बढ़कर टेक नेटवर्क
एक्सप्रेसवे अब महज कनेक्टिविटी का जरिया नहीं रहेंगे। इन्हें डेटा, सेंसर और एआई के मेल से चलने वाले इंटेलिजेंट नेटवर्क के तौर पर विकसित किया जा रहा है। निर्माण की रफ्तार के साथ अब फोकस क्वालिटी, निगरानी और टेक्नोलॉजी के बेहतर इस्तेमाल पर भी साफ दिख रहा है।
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