Uttar Pradesh

गो सेवा से गोल्ड इकोनॉमी : UP में डेयरी क्रांति, गांव-गांव से उठ रही समृद्धि की लहर

योगी सरकार की मिनी नंदिनी और नंद बाबा मिशन योजनाएं बनीं गेमचेंजर, यूपी देश का नंबर-1 दुग्ध उत्पादक, युवाओं की सालाना कमाई 12 लाख तक

लखनऊ, 7 मई 2026:

यूपी में गो सेवा अब आस्था के साथ हीप तेजी से एक मजबूत आर्थिक मॉडल में बदलती नजर आ रही है। सीएम योगी के नेतृत्व में डेयरी सेक्टर ने जिस गति से विस्तार किया है उसने ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई जान फूंक दी है। मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना और नंद बाबा दुग्ध मिशन जैसी योजनाओं ने किसानों और युवाओं की आय बढ़ाने के साथ ही गांवों में स्थायी रोजगार के अवसर भी पैदा किए हैं।

आज प्रदेश के हजारों युवा डेयरी उद्यम से जुड़कर सालाना 10 से 12 लाख रुपये तक कमा रहे हैं। जो पशुपालन कभी सीमित आय का साधन माना जाता था वही अब सम्मानजनक और लाभकारी व्यवसाय बन चुका है। मथुरा जिले के रदोई गांव के रहने वाले देवेन्द्र सिंह इसकी मिसाल हैं। नंद बाबा दुग्ध मिशन के तहत उनका चयन मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना में हुआ।

उन्होंने आठ साहिवाल और दो गिर नस्ल की गायों के साथ डेयरी यूनिट शुरू की। सरकार से उन्हें 50 प्रतिशत तक अनुदान मिला। आज उनकी डेयरी से रोजाना करीब 100 लीटर दूध उत्पादन हो रहा है। देवेन्द्र का कहना है कि सरकारी सहयोग ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का नया रास्ता दिखाया।

देश के कुल दुग्ध उत्पादन में प्रदेश की हिस्सेदारी 16 प्रतिशत से अधिक

पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम के अनुसार उत्तर प्रदेश ने दुग्ध उत्पादन में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। देश के कुल दुग्ध उत्पादन में प्रदेश की हिस्सेदारी 16 प्रतिशत से अधिक हो गई है। इससे यूपी देश का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक राज्य बन गया है। इस मामले में उसने राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों को पीछे छोड़ दिया है।

साहिवाल एवं गिर गोवंशों से बड़े पैमाने पर पैदा हो रहा रोजगार

इस बदलाव में स्वदेशी नस्लों की अहम भूमिका रही है। साहिवाल और गिर जैसी नस्लें बेहतर दूध उत्पादन और गुणवत्ता के लिए जानी जाती हैं। सरकार द्वारा इनके प्रोत्साहन से डेयरी सेक्टर को नई दिशा मिली है। गांवों में आधुनिक डेयरी यूनिट्स स्थापित होने से पशु आहार, परिवहन, दुग्ध संग्रहण और मार्केटिंग जैसे क्षेत्रों में भी रोजगार बढ़ा है।

सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब गांवों से पलायन रुकने लगा है। बढ़ती आय और स्थानीय रोजगार के चलते युवा अपने गांव में ही अवसर तलाश रहे हैं। डेयरी सेक्टर ने न केवल आर्थिक मजबूती दी है, बल्कि आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत की तस्वीर भी गढ़नी शुरू कर दी है।

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