Uttarakhand

कार्तिक स्वामी मंदिर में दिखी ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की झलक…जानिए उत्तर-दक्षिण का अनूठा संगम

रुद्रप्रयाग-पोखरी मार्ग पर कनकचौरी गांव के पास स्थित है मंदिर, भगवान शिव के बड़े पुत्र कार्तिकेय को समर्पित है मंदिर, कार्तिक स्वामी मंदिर की सबसे विशेष परंपरा है, वर्ष में एक बार होने वाला वस्त्रों का आदान-प्रदान

योगेंद्र मलिक

रुद्रप्रयाग, 8 मई 2026:

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जनपद स्थित कार्तिक स्वामी मंदिर में आयोजित विशेष धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-अर्चना के दौरान उत्तर व दक्षिण भारत की परंपराओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और वैदिक मंत्रोच्चारों से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में डूबा नजर आया।

कार्तिक स्वामी मंदिर रुद्रप्रयाग-पोखरी मार्ग पर कनकचौरी गांव के पास स्थित है। कनकचौरी गांव से लगभग तीन किलोमीटर की पैदल यात्रा मंदिर की मनमोहक सुंदरता को दर्शाती है। यह मंदिर भगवान शिव के बड़े पुत्र कार्तिकेय को समर्पित है। यह उत्तर भारत का कार्तिक स्वामी का एकमात्र मंदिर है। यहां भगवान कार्तिकेय ने पिता को अपनी भक्ति के प्रमाण के रूप में अपनी अस्थियां अर्पित की थीं। ये प्रसिद्ध मंदिर एक बार फिर राष्ट्रीय सांस्कृतिक एकता और धार्मिक आस्था का केंद्र बन गया है।

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मंदिर की सबसे विशेष परंपरा वर्ष में एक बार होने वाला वस्त्रों का आदान-प्रदान है। इस परंपरा के तहत उत्तर भारत से ले जाए गए विशेष वस्त्रों को विधि-विधान के साथ भगवान कार्तिक स्वामी को अर्पित किया जाता है। इस धार्मिक आयोजन में दक्षिण भारत से हजारों श्रद्धालु हर वर्ष यहां पहुंचते हैं और पूजा-अर्चना में सहभागी बनते हैं। इस बार भी बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। विशेष अनुष्ठान के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार, पारंपरिक पूजा पद्धति और दक्षिण भारतीय धार्मिक संस्कृति की झलक श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रही। वहीं, उत्तराखंड की लोक परंपराओं, स्थानीय वेशभूषा और रीति-रिवाजों ने आयोजन को और अधिक भव्यता प्रदान की। मंदिर परिसर में उत्तर और दक्षिण भारतीय संस्कृति का यह अनूठा समागम ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को साकार करता दिखाई दिया।

उत्तराखंड सरकार के अपर सचिव सी. रविशंकर और उत्तराखंड पर्यटन विभाग पिछले पांच वर्षों से कार्तिक स्वामी मंदिर को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। इन प्रयासों के चलते मंदिर क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिली है और देशभर से श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों का मानना है कि आने वाले समय में कार्तिक स्वामी मंदिर उत्तराखंड की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर के रूप में विश्व पटल पर एक नई पहचान स्थापित करेगा।

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